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कर्मेंदु शिशिर का आलेख 'अवधेश प्रधान के गद्य के साथ छोटी सी सहचर यात्रा'

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अवधेश प्रधान  परम्परा और आधुनिकता आम तौर पर एक दूसरे के विरोधाभासी लगते हैं। लेकिन ऐसा होता नहीं। परम्परा में सारी बातें गलत हों, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसी तर्ज पर यह भी कहा जा सकता है कि आधुनिकता में भी सारी बातें सही हैं। अवधेश प्रधान अपने लेखन में इस परम्परा और आधुनिकता की पड़ताल करते हुए ऐसे तथ्य सामने रखते हैं जो तर्कपूर्ण लगते हैं। वे नवजागरण के महत्त्व को समझने की जरूरत पर बल देते हैं। वह नवजागरण जिसने सही मायनों में भारतीयों के अन्दर आधुनिक विचारों का बीजारोपण किया। इस नवजागरण ने भारतीयों को अपने भीतर झाँकने की दृष्टि प्रदान की। इसी क्रम में वे स्वामी विवेकानंद के अवदान को विस्तार से रेखांकित करते हैं। वे आध्यात्मिकता के उन परतों को भी बेहिचक रेखांकित करते हैं जो मानवीय मूल्यों का पक्षधर है। उनके लेखन को आधार बना कर कर्मेंदु शिशिर ने वर्तमान साहित्य पत्रिका के नवंबर 2024 जुलाई 2026 के संयुक्तांक में एक विस्तृत आलेख लिखा है। यह आलेख इसलिए भी पढ़ा जाना चाहिए कि समकालीन दो विद्वान लेखक एक दूसरे के बारे में कितना जानते समझते हैं और अपने समकालिक शख्सियत पर  किस तरह लिखा जान...

अवधेश प्रधान का आलेख 'भोजपुरी लोक-मन में राम और सीता'

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अवधेश प्रधान राम कथा की व्याप्ति विविध भाषाओं में थोड़े मोड़े हेर फेर के साथ लगभग एक जैसी मिलती है। लेकिन लोक अपनी तरह से इस कहानी को देखता है और खुद को व्यक्त करता है। सबके अपने अपने राम और अपनी अपनी सीता हैं। इस अलग अलग लोक में सीता को ले कर अनेक अलग अलग तरह की कथाएँ प्रचलित हैं। एक भोजपुरी लोक  गीत को सुनते हुए लोक मर्मज्ञ राम नरेश त्रिपाठी यह लिखने के लिए बाध्य हुए कि "ऐसा हृदयद्रावक वर्णन न तो वाल्मीकि ने किया है, न कालिदास और भवभूति ने और न तुलसी और सूरदास ही ने।" अवधेश प्रधान भोजपुरी लोकगीतों के मर्मज्ञ हैं। नई किताब प्रकाशन से प्रकाशित उनकी एक महत्त्वपूर्ण किताब है 'सीता की खोज'। इस किताब का एक अध्याय है ' भोजपुरी लोक-मन में राम और सीता'। इस उम्दा आलेख को पढ़ कर आप भोजपुरी लोकगीतों के मुरीद हुए बिना नहीं रहेंगे। सीता राम की पत्नी हैं लेकिन जहां वे आहत होती हैं, वे राम के प्रति अपनी असहमति भी दर्ज कराती हैं। असहमति का अर्थ दुश्मनी नहीं होती। यह अपनों से ही जताई जा सकती है।  भोजपुरी लोक की संवेदना दुर्लभ है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  अवधेश प्रधान ...