चंद्रकांत
प्रकाशन- कविताएँ काव्यम् , उत्तरा , पक्षधर , परिकथा , अभिनव कदम एवं वर्तमान साहित्य में प्रकाशित। सांस्कृतिक रिपोर्ट हंस , समकालीन जनमत , कथादेश , कथन , वर्तमान साहित्य , उद्भावना में प्रकाशित। साक्षात्कार दस्तक एवं विदूषक में प्रकाशित। संप्रति -अध्यापन ‘कविता’ को लेकर आम तौर पर सभी कवि जरूर कभी न कभी चिन्तन-मनन करते हैं और इस पर कविताएं भी लिखते हैं. क्या कविता केवल शब्दों का जाल मात्र है. नहीं, कत्तई नहीं. अगर ऐसा होता तो जो कुछ भी कविता के नाम पर इस दुनिया में लिखा जाता वही कविता हो जाती. एक प्रश्न तो उठता ही है कि आखिर ‘बेहतर कविता कैसी होनी चाहिए.’ क्यों कुछ कविताएँ आम आदमी के जेहन में पूरी तरह रच-बस जाती है. दरअसल जो कविता हृदय की पीड़ा को सुनती-गुनती है. जिसमें सपनों के संग उड़ान भरने की सामर्थ्य के साथ-साथ यथार्थ के धरातल पर चलने की भी ताकत होती है. जिसमें उत्पीड़क व्यवस्था को बदल डालने का जादुई आह्वान होता है, जिसमें इस दुनिया को एक शोषणमुक्त दुनिया का रूप दे सकने का आईना होता है, वही बेहतर कविता होती है. वही कविता कालजयी कविता बन पाती है. कुछ ऐसे ही मनोभाव...