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जितेन्द्र श्रीवास्तव के काव्य-संग्रह ‘काल मृग की पीठ पर’ की यतीश कुमार की समीक्षा

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  जितेन्द्र श्रीवास्तव जितेन्द्र श्रीवास्तव हमारे समय के सुपरिचित कवि हैं। हाल ही में वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से उनका नया कविता संग्रह  ‘काल मृग की पीठ पर’ प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह पर कवि यतीश कुमार ने एक पारखी नजर डाली है। आज कवि  जितेन्द्र श्रीवास्तव का जन्मदिन है। उनके जन्मदिन पर पहली बार परिवार की तरफ से हार्दिक बधाई एवम शुभकामनाएं।  आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं जितेन्द्र श्रीवास्तव के काव्य-संग्रह ‘काल मृग की पीठ पर’ की यतीश कुमार द्वारा समीक्षा। आत्म-विवेक को संवेदित करती हैं ‘काल मृग की पीठ पर’ की कविताएँ यतीश कुमार “काल के मृग की पीठ पर चुपचाप बैठा भग्न-हृदय पर हारा नहीं चिंतित हूँ, विचलित हूँ पर बेचारा नहीं।"   काव्य-संग्रह ‘काल मृग की पीठ पर’ से गुजरते हुए यही लगा कि कवि अपनी पूरी सकारात्मकता के साथ इस संग्रह में उपस्थित है। वह स्मृतियों के कुएँ से रह-रह कर बाल्टी भर पानी निकालता है और उसी पानी से वृत्तचित्र बनाता है। चित्र अपनी छाप पाठकों के दिल पर छोड़ते हैं। उन चित्रों में दृष्टि, द्रष्टा और दृश्य तीनों एकमय हो कर पाठक से मि...

ताईवानी कवि ली मिन युंग की पाँच कविताएँ, अनुवाद - देवेश पथसारिया, जितेन्द्र श्रीवास्तव की भूमिका 'अनुवाद का सौंदर्य और ली मिन युंग का काव्य संसार'।

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      कवि विश्व का सार्वभौमिक नागरिक होता है। वह परिधियों से उबरने की कोशिश करते हुए बड़ा दायरा गढ़ने की कोशिश करता है। ताईवानी कवि ली मिन - युंग की कविताएं पढ़ते हुए हम इसे महसूस कर सकते हैं। ताईवान का लोकेल अपने यहाँ आसानी से गढ़ सकते हैं।     अनुवाद एक जादू की तरह होता है जो हमें दूसरी भाषा और संस्कृति से न केवल परिचित कराता है बल्कि उस दुनिया को महसूसने का अवसर भी प्रदान करता है। युवा कवि देवेश पथ सारिया एक बेहतर अनुवादक हैं। वे इस समय शोध के सिलसिले में ताईवान में ही हैं। उन्होंने हाल ही में ताईवानी कवि ली मिन युंग की कविताओं का अनुवाद किया है। देवेश का यह काम ' हकीकत के बीच दरार ' नाम से प्रकाशित हो चुका है। इस संग्रह की एक भूमिका लिखी है हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि जितेन्द्र श्रीवास्तव ने। आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं जितेन्द्र श्रीवास्तव की भूमिका ' अनुवाद का सौंदर्य और ली मिन युंग का काव्य ...