प्रचण्ड प्रवीर की कहानी 'पिया तोसे नैना लागे रे'
प्रचण्ड प्रवीर उम्र के एक पड़ाव के दौरान एक दूसरे के प्रति लगाव सहज ही हो जाता है। कई बार यह लगाव महज दोस्ती तक सीमित रह जाता है तो कई बार यह प्यार जनम जनम के रिश्ते में तब्दील हो जाता है। कभी लगता है प्यार झूठा है तो कभी यह सच्चा लगने लगता है। हँसी मजाक जीवन की एकरसता को तोड़ते हैं और व्यक्ति को जीवन्त बनाते हैं। खासकर प्यार में इस हँसी मजाक की भूमिका अलग रंगत लिए होती है। प्रचण्ड प्रवीर अपनी कहानियों में हिन्दी फिल्मी गीतों का बखूबी इस्तेमाल करते हैं। इस कहानी में भी कुछ रोमांटिक गीत गज़ल का प्रयोग उन्होंने बखूबी किया है। इस कहानी का शीर्षक ही एक लोकप्रिय गीत के मुखड़े से लिया गया है। बहरहाल आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं प्रचण्ड प्रवीर की कहानी 'पिया तोसे नैना लागे रे'। कल की बात – २९१ 'पिया तोसे नैना लागे रे' प्रचण्ड प्रवीर कल की बात है। जैसे ही मैँने बृजेश के घर मेँ कदम रखा, मेहमानों की भीड़ मेँ से दमकती सुचित्रा भाभी निकल कर मेरी तरफ आयीँ। मैँने उनको जन्मदिन की बधाई देते हुए फूलों का गुच्छा उनकी ओर बढ़ायी। उन्होँने उलाहना दिया, “ये क्या फूल-पत्ते? मुझे लगा था कि आप ...