शंभुनाथ का आलेख 'आत्मनिरीक्षण का जोखिम'
किसी भी व्यक्ति के लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण होता है आत्म निरीक्षण। हालांकि आज का समय ही कुछ ऐसा है कि लोग आत्म निरीक्षण से बचना चाहते हैं। व्यक्तित्व के विकास के लिए यह बहुत जरूरी होता है। कबीर अपना आत्म निरीक्षण करते हुए कहते हैं 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय। जो दिल खोजा आपना मुझ सा बुरा न कोय।' यह आत्म निरीक्षण कमजोर व्यक्ति कर ही नहीं सकता। इसके लिए साहस की जरूरत होती है। इस आत्म निरीक्षण पर ही शंभुनाथ जी ने ’वागर्थ’ मई-2023 की अपनी संपादकीय लिखी है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं शंभुनाथ का आलेख 'आत्मनिरीक्षण का जोखिम' 'आत्मनिरीक्षण का जोखिम' शंभुनाथ कई बार मनुष्य के पास सिर्फ एक उपाय होता है, ‘जो घटित हो रहा है उसे चुपचाप जियो’। यह अंधेरे का फोटो खींचने से अलग हो सकता है, यदि हमारे सामने यह सवाल हो- ‘फिर भी यह जीवन अपना है, तो इसका क्या अर्थ है?’ इस प्रश्न का संबंध सबसे पहले आत्मनिरीक्षण से है। भारतीय समाज में सामंती मानसिकता की प्रधानता के कारण यह कठिन है, पर जरूरी है। हमें जिन चीजों से परेशानी होती है, सबसे पहले यह दे...