अच्युतानंद मिश्र का आलेख 'ऐ काश जानता न तेरी रहगुजर को मैं'
लांग नाईन्टीज को ले कर हमने पहले भी इस ब्लॉग पर एक बहस चलायी थी जिसके अन्तर्गत विजेन्द्र जी, आग्नेय जी, अमीर चंद वैश्य, अशोक तिवारी और महेश चन्द्र पुनेठा के आलेख प्रकाशित हुए थे । इस बहस को 'पहल' ने भी आगे बढाया जिसमें मृत्युंजय, विवेक निराला और अच्युतानन्द मिश्र के लेख प्रकाशित हुए हैं । इसी कड़ी को आगे बढाने के क्रम में हमने विवेक निराला के आलेख को पहली बार पर प्रकाशित किया था । अब प्रस्तुत है युवा कवि आलोचक अच्युतानन्द मिश्र का आलेख 'ऐ काश जानता न तेरी रहगुजर को मैं' ऐ काश जानता न तेरी रहगुजर को मैं अच्युतानंद मिश्र पिछले दिनों पहल...