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जयंत जिज्ञासु का आलेख 'अपने पैमाने वाले चंद्रशेखर जी'

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चंद्रशेखर  चंद्रशेखर भारतीय राजनीति के कुछ उन पुरोधाओं में से एक रहे हैं जिनका सम्मान हर पार्टी के लोग किया करते थे। उन्होंने कांग्रेस तब छोड़ी जब वे कोई बेहतर पद प्राप्त कर सकते थे। उन्होंने जेल जाना पसंद किया लेकिन नैतिकता से समझौता करना उनका उसूल था ही नहीं। उस समय जनता पार्टी का गठन करने में उनकी भूमिका अग्रणी थी। चंद्रशेखर जी को नवगठित जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।पाकिस्तान के साथ भारत के सम्बन्ध आज भी अच्छे नहीं हैं और उसके साथ हमेशा एक युद्ध उन्माद जैसी स्थिति बनी रहती है। चंद्रशेखर जी ने तब भी पाकिस्तान के साथ युद्ध का विरोध किया। यही नहीं परमाणु बम बनाने के पक्ष में भी वे नहीं रहे। आज युद्ध के उन्माद में डूबी हुई दुनिया के लिए उनके सन्देश कारगर साबित हो सकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के वे हमेशा समर्थक रहे। प्रधानमंत्री बनने के पश्चात एक अवसर पर उन्होंने कहा "मैं उन नौजवानों से कहना चाहता हूं, उनके विचारों से मैं असहमत हो सकता हूं, उनकी मांगों को मानने में शायद मैं असमर्थ हो सकता हूं। लेकिन मैं उनको न्योता देता हूं, अपनी बातों को रखने के लिए पूरे आज़ाद हैं। प्रतिरोध का...

चंद्रशेखर की जेल डायरी पर हरिवंश का आलेख

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  चंद्रशेखर 10 नवंबर 1990 और 21 जून 1991 के बीच भारत का प्रधान मंत्री एक ऐसा व्यक्ति बना जो एक सामान्य कृषक परिवार का था। यह व्यक्ति थे चंद्रशेखर जी। वे अखिल भारतीय कांग्रेस के सम्मानित सदस्य थे। हरिवंश के अनुसार कांग्रेस में चंद्रशेखर अकेले ऐसे व्यक्ति थे, जो पार्टी की सबसे महत्वपूर्ण व निर्णायक समिति (कांग्रेस वर्किंग कमिटी) के चुने गए सदस्य थे। आपात काल का विरोध करने के कारण उन्हें जेल में डाल दिया गया। जेल में रहते हुए ही उन्होंने जो जेल डायरी लिखी वह आपात काल को जानने के लिए एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है। चंद्रशेखर की यह डायरी उनकी वैचारिक दृढ़ता का आईना है। चंद्रशेखर ऐसे दुर्लभ प्रधानमंत्रियों में से एक थे जो साहित्यिक सरोकारों से भी गहरे तौर पर जुड़े हुए थे। उनकी डायरी से ही पता चलता है कि उन्होंने कामू की अनेक किताबें पढ़ी। ‘प्लेग’, ‘अ सर्टेन डेथ’। पर, एक किताब का जिक्र बार-बार आया है, वह है, ‘रिबेल’ (विद्रोही)। 'रिबेल' में उनकी दिलचस्पी इस हद तक थी कि निर्मल वर्मा के एक लेख में उसका एक उद्धरण देख कर उन्होंने उनका पूरा लेख पढ़ डाला और फिर उस पर अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया भी ...