जयंत जिज्ञासु का आलेख 'अपने पैमाने वाले चंद्रशेखर जी'
चंद्रशेखर चंद्रशेखर भारतीय राजनीति के कुछ उन पुरोधाओं में से एक रहे हैं जिनका सम्मान हर पार्टी के लोग किया करते थे। उन्होंने कांग्रेस तब छोड़ी जब वे कोई बेहतर पद प्राप्त कर सकते थे। उन्होंने जेल जाना पसंद किया लेकिन नैतिकता से समझौता करना उनका उसूल था ही नहीं। उस समय जनता पार्टी का गठन करने में उनकी भूमिका अग्रणी थी। चंद्रशेखर जी को नवगठित जनता पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।पाकिस्तान के साथ भारत के सम्बन्ध आज भी अच्छे नहीं हैं और उसके साथ हमेशा एक युद्ध उन्माद जैसी स्थिति बनी रहती है। चंद्रशेखर जी ने तब भी पाकिस्तान के साथ युद्ध का विरोध किया। यही नहीं परमाणु बम बनाने के पक्ष में भी वे नहीं रहे। आज युद्ध के उन्माद में डूबी हुई दुनिया के लिए उनके सन्देश कारगर साबित हो सकते हैं। अभिव्यक्ति की आजादी के वे हमेशा समर्थक रहे। प्रधानमंत्री बनने के पश्चात एक अवसर पर उन्होंने कहा "मैं उन नौजवानों से कहना चाहता हूं, उनके विचारों से मैं असहमत हो सकता हूं, उनकी मांगों को मानने में शायद मैं असमर्थ हो सकता हूं। लेकिन मैं उनको न्योता देता हूं, अपनी बातों को रखने के लिए पूरे आज़ाद हैं। प्रतिरोध का...