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अरूण कमल के कविता कर्म पर अच्युतानन्द मिश्र का आलेख ‘यहाँ रोज कुछ बन रहा है।‘

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अरुण कमल अरूण कमल हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि हैं । इनके सम्पूर्ण कविता कर्म पर हाल ही में एक आलेख लिखा है युवा कवि और आलोचक अच्युतानन्द मिश्र ने। तो आइए पढ़ते हैं अच्युतानन्द का आलेख ‘यहाँ रोज कुछ बन रहा है।‘        यहाँ रोज कुछ बन रहा है अच्युतानंद मिश्र आठवें दशक की कविता की केन्द्रीय संकल्पना क्या है? वह कौन सी दृष्टि या परिकल्पना है जिसके तहत आठवें दशक की कविता एक नया आयाम रचती है । एक तरफ तो यह स्पष्ट है कि पूरा काव्य परिदृश्य अपने से ठीक पहले यानि साठोत्तरी कविता के प्रति एक आलोचनात्मक रुख के साथ विकसित होता है । यही वजह है कि इस कविता ने आरम्भ में ही कविता में मौजूद राजनीतिक लफ्फाजी का विरोध किया था । बावजूद इसके आज जब हम आठवें दशक की कविता को देखते हैं तो मुझे यह लगता है कि महज़ इस आधार पर या समय विशेष के आधार पर बहुत सारे कवियों के वैशिष्ट्य को नकारते हुए ही हम इस तरह के सामान्यीकरण की और उन्मुख होते है । यह भी संभव है कि किसी दौर विशेष में इस तरह की परिकल्पना इजाद करना एक रणनीतिक मजबूरी हो लेकिन आज जब हम यानि आठवें दशक के तक़रीब...