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अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख 'सिनेमा की काया का द्रष्टा'

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अमरेन्द्र कुमार शर्मा  कला जीवन की एकरसता को तोड़ती है और मनुष्य को संवेदनशील बनाती है। कला के अनेक माध्यम हैं। इन माध्यमों में सिनेमा वह माध्यम है जिसके दोहरे आयाम हैं। दृश्य के साथ साथ श्रव्य भी। इन दोनों का किसी भी दर्शक के मन मस्तिष्क पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसीलिए मनोरंजन के माध्यम के रूप में सिनेमा अन्य कलाओं से अग्रणी दिखाई पड़ता है। अपनी शुरुआत से ले कर आज तक हिन्दी सिनेमा कई चरणों से हो कर गुजरा है। आजकल यह ओ टी टी स्टेज में है।  अमरेन्द्र कुमार शर्मा ने हिन्दी सिनेमा के चरित्र और उसके विकास को ले कर तीन विशेषज्ञ लेखकों से बातचीत किया है। ये विशेषज्ञ लेखक हैं : विजय पाडलकर, विजय शर्मा और मनोज रूपड़ा। अमरेन्द्र शर्मा ने एक ही तरह के कुल आठ सवाल इन तीनों विशेषज्ञों से किए हैं। इन सवालों के जरिए इक्कीसवीं सदी में हिंदी सिनेमा के विभिन्न दृष्टिकोणों को ले कर सिनेमा  लेखन पर गम्भीर विमर्श किया गया है। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं बातचीत पर आधारित अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख 'सिनेमा की काया का द्रष्टा'। 'सिनेमा की काया का द्रष्टा'  अमरेन्द्र कुमार शर्मा...

अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख 'औपनिवेशिक विषाद और वि-उपनिवेशीकरण की आवाजें'

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  फ्रेंज फैनन   हम भले ही खुद के आधुनिक होने का दावा करें लेकिन हमारी मनोवृत्तियां यह साबित कर देती हैं कि सही मायनों में तो हम सभ्य हुए ही नहीं। रंग भेद ऐसी ही मनोवृत्ति है जो आमतौर पर उन श्वेत चमड़ी वाले लोगों का वह फितूर है जिसके चलते वे खुद को श्रेष्ठ मानते हैं जबकि काले अफ्रीकी लोगों को असभ्य और पिछड़ा मानते हैं। यूरोपीय औपनिवेशिक देशों ने एशिया, कैरेबियाई देशों और अफ्रीकी देशों पर अपने शासन को 'व्हाइट मैंस बर्डन' का भ्रामक टर्म गढ़ कर औचित्यपूर्ण साबित करने की कोशिशें की। लेकिन एक न एक दिन उनका यह भ्रम तो टूटना ही था। अफ्रीकी और एशियाई देशों के लोग जब अपने अध्ययन के क्रम में यूरोपीय देश गए तो वहां भी उनके नस्लीय भेदभाव के शिकार हुए।  फ्रेंज ओमर फैनन ऐसे ही विचारक थे जिन्होंने फ्रांस में अपनी पढ़ाई के दौरान अपने साथ होने वाले नस्लीय भेदभाव को महसूस किया। इसी भेदभाव को उन्होंने अपने लेखन में उतारा। अनुभवबद्ध होने के कारण उनका लेखन वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय माना गया। अमरेन्द्र कुमार शर्मा ने  फ्रेंज फैनन के चिन्तन की एक गहन पड़ताल की है। आइए आज पहली बार पर हम पढ़त...