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कुमार वीरेन्द्र का आलेख "जन चेतना के निर्माण का दहकता दस्तावेज 'हिन्दू पंच' का 'बलिदान अंक' "

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कुमार बीरेंद्र  भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में पत्र पत्रिकाओं की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इन पत्र पत्रिकाओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जन चेतना तैयार करने में एक बड़ी भूमिका निभाई। ब्रिटिश शासन इन पत्र पत्रिकाओं को नियंत्रित करने के लिए हमेशा तमाम उपक्रम करता रहा। ऐसे पत्रों में 'चांद' के साथ-साथ ' हिन्दू  पंच' नाम भी प्रमुख है। अंग्रेजों ने चांद के फांसी अंक पर तो प्रतिबंध लगाया ही, हिन्दू पंच' के बलिदान अंक को भी जब्त कर लिया। ' हिन्दू  पंच' का 'बलिदान अंक' पहले ही उसके पाठकों के हाथों में जा चुका था। इस पत्र ने अपना मुख्य काम कर दिया था। ' हिन्दू  पंच' के इस 'बलिदान अंक' को केन्द्रित कर कुमार वीरेंद्र ने एक महत्वपूर्ण आलेख लिखा है जिसे 'उत्तर प्रदेश' के 'जब्तशुदा साहित्य विशेषांक' जनवरी अप्रैल 2023 में प्रकाशित किया गया है। हम इस आलेख को साभार प्रस्तुत कर रहे हैं। आज कुमार वीरेंद्र का जन्मदिन है कुमार वीरेंद्र की रुचि शोध में है और वह अपने आलेख में शोध पर विशेष ध्यान रखते हैं। वे बिना शोरोगुल के चुपचाप अपना काम ...

कुमार वीरेन्द्र का आलेख 'पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे'

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  1921 में फणीश्वर नाथ रेणु का जन्मशताब्दी वर्ष पूरे देश में मनाया गया। कई पत्रिकाओं ने रेणु जी पर अपने महत्त्वपूर्ण अंक प्रकाशित किए। अकादमिक जगत में भी रेणु जी की रचनाधर्मिता पर तमाम चर्चाएं आयोजित की गईं। इलाहाबाद तब साहित्य का गढ़ माना जाता था। इस इलाहाबाद से भी रेणु का अपना एक खास रिश्ता था। कुछ समय उन्होंने इलाहाबाद में भी बताया था। रेणु के इलाहाबादी जुड़ाव पर एक शोधपरक नजर डाली है युवा आलोचक कुमार वीरेन्द्र ने। कल रेणु जी का जन्मदिन था। हम पहली बार की तरफ से उनकी स्मृति को नमन करते हैं। आज कुमार वीरेन्द्र का जन्मदिन है। उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं कुमार वीरेन्द्र का आलेख 'पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे'। 'पतियाइए कि रेणु इलाहाबाद में रहे थे'                             कुमार वीरेन्द्र कुछ लोग कुछ दिनों के लिए कुछ जगहों पर कुछ-कुछ ऐसे रहते-बसते हैं कि वे जगहें और उनका बहुत कुछ उन प्रवासियों को बेचैन किए रहती हैं। यह बेचैनी जीवन भर अंदर-अंदर धधकती-भभकती रहती है।...