पल्लवी की कविताएँ
पल्लवी परिचय नाम – डॉ पल्लवी पिता का नाम – श्री जयराम शिक्षा – एम. ए. (हिंदी साहित्य), पीएच. डी. (पूर्वाचल विश्वविद्यालय से ) गालियां दुनिया की प्रायः हर भाषा में पाई जाती है। जहां एक तरफ अपने वर्चस्व को प्रदर्शित करने की शब्दावली बन जाता है वहीं दूसरी तरफ कमजोर लोगों के लिए यह प्रतिरोध व्यक्त करने का अपना एक तरीका है जिसके जरिए वे अपनी हिकारत को व्यक्त कर सकते हैं। मन ही मन गाली देने से भला उन्हें कौन रोक सकता है। स्त्रियों को इस अपमान को कहीं अधिक झेलना पड़ता है। इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि दुनिया की अधिकांश गालियां स्त्रीसूचक ही हैं। अपनी एक कविता में आक्रोश व्यक्त करते हुए कवयित्री पल्लवी लिखती हैं : ' मैं काव्य का नहीं/ गाली का सृजन करना चाहती हूँ/ जब मनुष्य से कम चिन्हित होना/ अपमान लगे।/ उस गाली का/ मैं भजन करना चाहती हूँ।' आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं पल्लवी की कविताएं। पल्लवी की पाँच कविताएँ मेरा पता मुझसे मिलने के लिए कभी फ़ोन नहीं करना मैं जहाँ से गुज़री वापस लौटी ही नहीं...