श्रीराम त्रिपाठी का एक आलेख 'मुर्दहिया'
तुलसी राम बीते 13 फरवरी 2015 को हिन्दी साहित्य की एक ऐसी क्षति हुई जिसकी भरपाई हो पाना नामुमकिन है । तुलसीराम का जन्म आजमगढ़ के धरमपुर में एक जुलाई 1949 को हुआ था । प्राथमिक शिक्षा गाँव से ही हुई । आगे की पढाई बी एच यू और जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय से हुई । फिर ये जवाहर लाल नेहरू विश्व विद्यालय में ही अध्यापन करने लगे । तुलसीराम बौद्ध धर्म और दर्शन के गंभीर अध्येता थे । उनका व्यक्तित्व और दलित चिंतकों से पूरी तरह अलग था । दरअसल वे इसके मूल में था उनका फक्कड़ाना स्वभाव जो उन्हें कबीर से मिला था । बचपन से ही वे सवर्णों की अनेक प्रताड़नाओं के शिकार हुए इसीलिए वे जाति व्यवस्था के घोर विरोधी थे । लेकिन वे भारत की हकीकत को जानते थे । उन्हें पता था कि भारत नामक देश की यह जो इमारत है उसकी दीवालों से लगायत छत तक जाति, धर्म, वर्ग जैसी मकड़ी के वैसे जाले फैले हुए हैं जिससे पार पाना बहुत दुष्कर है । यहाँ के लोग जब तक अपनी कुंठित जातिवादी मानसिकता को नहीं छोड़ेंगे तब तक सच्चे मायनों में एक आधुनिक प्रगतिशील एवं वैज्ञानिक भारत का निर्माण संभव ही नहीं । वे स्वभाव ...