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यतीश कुमार की समीक्षा 'रूहों की तस्वीर बनाने वाला चित्रकार'।

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    कला मनुष्य के हृदय में स्वयमेव ही जन्मी ऐसी अभिरुचि है जो न केवल स्वयं को अपितु समूची कायनात को मनुष्यता का पक्षधर बनाती है। यह मनुष्य के शुरुआती विकास क्रम से जुड़ी हुई है। कला वस्तुतः रूह से ही निकल कर रूपायित होती है। और रूपायित भी होती है तो कुछ इस कदर कि उसके सम्पर्क में आने वाला भी खुद को उससे जुड़ा हुआ पाता है। कवि यतीश कुमार की रुचि केवल कविता ही नहीं , कला के विविध क्षेत्रों में है। इन दिनों वे कुछ उम्दा कृतियों से हो कर गुजर रहे हैं। इसी क्रम में यतीश ने हाल ही में प्रभात मिलिन्द द्वारा अनुदित एक किताब ' कलाकार ' पढ़ी है। यतीश का पढ़ना वस्तुतः एक समानांतर रचनाधर्मिता ही है। मूलतः यह किताब कुणाल बसु ने अंग्रेजी में   ' मिनिएच रिस्ट ' (The Miniaturist) नाम से लिखी है। प्रभात का खूबसूरत अनुवाद पढ़ते हुए किंचित भी यह आभास नहीं होता कि यह एक अनुदित किताब है। यही तो एक कुशल रचनाकार की ताकत होती है। यतीश कुमार ने इस किताब को पढ़ते हुए यह समीक्षा लिखी है जिसे आज हम पहली बार पर प्रस्तुत कर रहे हैं। तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं यतीश कुमार की समीक्षा ' ...