आशीष सिंह का आलेख 'बेहतर दुनिया के भविष्य स्वप्नों के कथाकार रमेश उपाध्याय'
रमेश उपाध्याय प्रख्यात आलोचक , कहानीकार और सम्पादक रमेश उपाध्याय के न होने की खबर पर यकीन करना अब भी मुश्किल हो रहा है । रमेश जी से बात करना हमेशा एक युग से बात करना होता था । वे सहजता की प्रतिमूर्ति थे । ‘ कथन ’ जैसी महत्त्वपूर्ण पत्रिका निकालकर उन्होंने लघु पत्रिका आंदोलन को एक नयी दिशा देने का कार्य किया । उनका यकीन विज्ञान पर था । कहानी हो या आलोचना , अनुवाद हो या सम्पादन , सभी माध्यमो के जरिये धर्म के ढोंग और अंधविश्वास से वे आजीवन संघर्ष करते रहे। हमने जब भी अनहद में लिखने के लिये अनुरोध किया उन्होने मना नहीं किया । ‘ पहली बार ’ को भी रमेश जी का स्नेह बराबर मिलता रहा । रमेश जी को नमन करते हुए आज पहली बार पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं युवा आलोचक आशीष सिंह का आलेख ' बेहतर दुनिया के भविष्य स्वप्नों के कथाकार रमेश उपाध्याय ’ । ' बेहतर दुनिया के भविष्य स्वप्नों के कथाकार रमेश उपाध्याय' आशीष सिंह ' कोरोना की वैश्विक महामारी से होने वाले नुकसान तो असंख्य हैं , जिनमें सबसे बड़ा होगा करो...