परांस-9 : मनोज शर्मा की कविताएं
कमल जीत चौधरी इस दुनिया में मनुष्य ने अपने आस पास के तमाम चीजों के नामकरण किए हैं। पेड़-पौधों, और फूलों-फलों के नाम इसी क्रम में रखे गए। लेकिन तमाम फूल ऐसे भी हैं जिनका अस्तित्व तो है लेकिन उनका नामकरण नहीं हो पाया। इन फूलों का भी अपना अस्तित्व हुआ। इन की भी अपनी जिंदगी है। मनोज शर्मा ऐसे ही अनाम फूलों के कवि हैं। उन अनाम फूलों की खुशी और उन्हें समुचित सम्मान देने वाले कवि हैं। इस बार 'परांस' के कवि हैं मनोज शर्मा। बीते 29 अप्रैल 2025 को अचानक उनके देहांत की जब खबर आई हम हतप्रभ रह गए। कमल जीत चौधरी का यह आलेख एक तरह से मनोज शर्मा के प्रति आदरांजलि भी है। अप्रैल 2025 से कवि कमल जीत चौधरी जम्मू कश्मीर के कवियों को सामने लाने का दायित्व संभाल रहे हैं। इस शृंखला को उन्होंने जम्मू अंचल का एक प्यारा सा नाम दिया है 'परांस'। परांस को हम हर महीने के तीसरे रविवार को प्रस्तुत कर रहे हैं। अपरिहार्य कारणों से इस महीने यह कॉलम चौथे रविवार को प्रस्तुत किया जा रहा है। इस कॉलम के अन्तर्गत अभी तक हम अमिता मेहता, कुमार कृष्ण शर्मा, विकास डोगरा, अदिति शर्मा, सुधीर महाजन, दीपक, शाश्विता...