प्रतिभा चौहान की कविताएँ
प्रतिभा चौहान आम आदमी सामान्य तौर पर अपनी समस्याओं में कुछ इस तरह उलझा होता है कि राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घटने वाली ऐसी घटनाएं, जो पूरी दुनिया को प्रभावित करती हैं और जिनके बारे में हम यह मुगालता पाल लेते हैं कि यह तो दुनिया के सभी व्यक्तियों को पता होगा, उसे आमतौर पर पता नहीं होती। उसे इस तरह की राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय घटनाओं से कोई बहुत फर्क भी नहीं पड़ता। हां, इस आम आदमी को तब फर्क पड़ता है जब उसकी रोजी-रोटी प्रभावित होती है। जब उसके दो वक्त का खाना प्रभावित होता है। जब उसके जरूरत की वस्तुएं आसानी से नहीं मिल पाती है, तब उसे फर्क जरूर पड़ता है। हालांकि इसका राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर की घटनाओं से कुछ भी सरोकार नहीं है। लेकिन एक आम आदमी की ये मामूली चिंताएं एक कवि के लिए एक बड़ी चिंता की तरह होती हैं। कवि का काम इस चिंता को उभारना ही होता है। प्रतिभा चौहान अत्यंत संवेदनशील कवयित्री है और अपनी एक कविता 'फरक पड़ता है' में वे इस आम आदमी की समस्या के बारे में बड़ी संजीदगी से बात करती हैं। आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं प्रतिभा चौहान की कुछ नई कविताएं। प्रतिभा ...