रवि नन्दन सिंह का आलेख 'इलाहाबाद की साहित्यिक भूमि और प्रेमचंद'
किसी भी रचनाकार के विकास में उस जगह का विशिष्ट स्थान होता है जहाँ वह अपने जीवन का अमूल्य समय बिता चुका होता है। प्रेमचंद का इलाहाबाद से एक ऐसा रिश्ता बना जिसका निर्वहन उन्होंने आजीवन किया। यहीं पर रहते हुए उन्होंने अपनी कुछ विशिष्ट कृतियां रची। रविनंदन सिंह के अनुसार उन्होंने अपना पहला उपन्यास ‘असरारे मआबिद’ अर्थात् ‘देवस्थान का रहस्य’ यहीं पर रहते हुए लिखना आरंभ किया। यह उपन्यास बनारस से प्रकाशित होने वाले साप्ताहिक ‘आवाजे-खल्क’ में अक्टूबर 1903 से फरवरी 1905 तक धारावाहिक रूप में प्रकाशित हुआ। इस उपन्यास के लेखक का नाम था—धनपत राय उर्फ ‘नवाबराय अलाहाबादी’। पढ़ाई से ले कर नौकरी तक इलाहाबाद से प्रेमचंद का 'कभी नीम तो कभी शहद सम्बन्ध' बना रहा। यहीं पर रहते हुए प्रेमचंद पर साहित्यिक चोरी का इल्जाम लगा। आज प्रेमचंद का जन्मदिन है। उनकी स्मृतियों को नमन करते हुए आज पहली बार पर हम प्रस्तुत करते हैं रवि नन्दन सिंह का आलेख 'इलाहाबाद की साहित्यिक भूमि और प्रेमचंद'। 'इलाहाबाद की साहित्यिक भूमि और प्रेमचंद' रवि नन्दन सिंह प्रेमचंद और इ...