पंकज मोहन का आलेख 'हरदेवी कथा'
पंकज मोहन 'सीमंतनी उपदेश' ऐसी किताब है जिसकी मूल प्रति में किसी भी लेखक का नाम नहीं है। शोधकर्ता चारु सिंह ने यह दावा किया कि उन्होंने ही पहली बार यह खोज किया कि इस किताब की लेखिका हरदेवी हैं। रमन सिन्हा और गरिमा श्रीवास्तव के गम्भीर आलेखों के आने के बाद उन पर स्रोतों के इस्तेमाल को ले कर आरोप भी लगाए गए। हाल ही में शोधकर्ता पंकज मोहन ने अपने अध्ययन के आधार पर उद्घाटित करते हैं कि " 'इन्डियन मैगजीन' के जून 1889 के अंक मे तीन हिन्दी-उर्दू पुस्तक की समीक्षा छपी, लेकिन समीक्षक का नाम सिर्फ तीसरी पुस्तक की समीक्षा के नीचे छपी। मेरी दृष्टि में तीनो पुस्तकों के समीक्षक पिन्काट थे। एक पुस्तक बालवाड़ी या किंडरगार्टन शिक्षा से सम्बद्ध थी जिसकी रचयिता हरदेवी थीं। इसी समीक्षा में फ्रेडरिक पिन्काट ने हरदेवी को "सीमंतनी उपदेश" नामक पुस्तक (जिसकी लेखिका का नाम पुस्तक में कहीं भी अंकित नहीं था) की रचयिता बताया। चारु सिंह अगर इस महत्वपूर्ण शोध सामग्री से परिचित होती, तो यह दावा नहीं करती कि "सीमंतनी उपदेश" की लेखिका की खोज सबसे पहले उन्होंने की। इसका श्रेय...