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सारिका सिंह की कविताएं

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  सारिका सिंह  दिल्ली विश्वविद्यालय से परास्नातक करने के बाद उत्तर प्रदेश के लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित पी सी एस सेवा में चयन। वर्तमान में जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर कार्यरत। कविता के माध्यम से भाव को व्यक्त करने में विशेष रूचि। हर सुबह के साथ जिंदगी की एक नई शुरुआत होती है। हर सुबह के साथ एक नए दिन और नए तारीख का आगाज़ होता है। हर सुबह एक नई उम्मीद और एक नई प्रत्याशा लिए आती है। कवि का संवेदनशील मन इस सुबह से एक अलग तरह की उम्मीद करता है। कवि वह बेहतर समाज चाहता है जहां कोई भेदभाव न हो, बल्कि सब बराबर हों। वे किसान और मजदूर जिनके दम पर आज हमारी दुनिया का इकबाल बुलन्द है, वे भी एक बेहतर जिंदगी पाएं। कवि राम जियावन दास बावला के शब्दों में कहें तो 'चिरई के पुतवो ना कतहूं कंगाल हो'। कवि सबसे ऊपर मनुष्यता के धर्म को रखता है। संकीर्णताएं उसे सीमित कर पाने में विफल रहती हैं।  कवयित्री सारिका सिंह अपनी कविता 'एक ऐसी सुबह हो' में एक ऐसी ही दुनिया की खूबसूरत परिकल्पना करती हैं। कविताओं की दुनिया में सारिका का यह आगाज़ है। उनकी कविताएं एक बेहतर कवि के भविष्य के ...