सुधा अरोड़ा से प्रेम भारद्वाज की बातचीत
मन्नू भंडारी के साथ सुधा अरोड़ा किसी के मुंह पर खरी खरी बात कह देना आसान नहीं होता। वह भी तब जब बात प्रतिष्ठित कथाकार और हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव की हो। सुधा अरोड़ा ने इस कठिन को अपने साहस से आसान बनाया। पाखी के सम्पादक प्रेम भारद्वाज ने राजेन्द्र यादव को ले कर सुधा जी से एक लम्बा साक्षात्कार लिया था। इस साक्षात्कार में सुधा जी ने राजेन्द्र यादव के जीवन और व्यवहार के विभिन्न पक्षों पर बेबाकी से बात किया। बातचीत राजेन्द्र यादव की हो, और मन्नू भंडारी की बात न आए, भला यह कैसे हो सकता था। मन्नू जी जैसी धीर गम्भीर लेखिका ने कभी पलटवार नहीं किया। रचना की तरह उनका व्यक्तित्व भी साफ सुथरा था। राजेन्द्र यादव के स्त्री विमर्श की खासी चर्चा की जाती है। एक सवाल के जवाब में सुधा जी ने कहा - 'होना सोना' आलेख पर मेरी प्रतिकिया तब हुई जब उन्होंने अपने संपादकीय में विरोध करने वाली 'करवाचौथी औरतों' की जमात में मेरा भी नाम डाल दिया जबकि उस लेख पर कलम उठाने की मेरी कोई मंशा नहीं थी, न मैंने इसका जिक्र किया था। मैंने अपनी प्रतिक्रिया उन्हें सिर्फ पढ़ने के लिये भेजी थी पर उन्होंने अ...