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रोक़ डाल्टन की कविताएं:

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Roque Dalton रोके एंटोनियो डाल्टन गार्सिया सल्वाडोरियन कवि, निबंधकार, पत्रकार, राजनीतिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी थे। रोके डाल्टन नाम से वे अधिक प्रख्यात थे। लैटिन अमेरिका के सबसे प्रभावशाली कवियों में उनका नाम अग्रणी है। एल साल्वाडोर (स्पैनिश:República de El Salvador) मध्य अमेरिका में स्थित सबसे छोटा और सबसे सघन आबादी वाला देश है।  मार्क्सवादी-लेनिनवादी होने के नाते, वे 1957 में अल सल्वाडोर की कम्युनिस्ट पार्टी में शामिल हुए और उसी वर्ष सोवियत संघ का दौरा किया। बाद में, जोस मारिया लेमस के राष्ट्रपति काल के दौरान विद्रोह भड़काने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। कारावास से छूटने के बाद, डाल्टन क्यूबा में निर्वासन में रहे, जहाँ उन्होंने एक लेखक के रूप में अपना करियर विकसित किया और उनकी अधिकांश कविताएँ प्रकाशित हुईं। बाद में उन्होंने प्राग स्थित 'द इंटरनेशनल रिव्यू : प्रॉब्लम्स ऑफ पीस एंड सोशलिज्म' के संवाददाता के रूप में कार्य किया और 1969 में अपनी पुस्तक 'टैबर्ना वाई ओट्रोस लुगारेस' के लिए कासा डे लास अमेरिकास कविता पुरस्कार जीता। अपने जीवन के अंतिम वर्षों में डाल...

युद्ध के विरुद्ध कविता : 3, टेरी एरेट की कविता फ़ासीवाद जब आएगा

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Terry Ehret फासीवाद, नाजीवाद मूलतः एक प्रवृत्ति है। जरूरी नहीं कि तानाशाह शासक शुरू में तानाशाह जैसा ही दिखे। इतिहास गवाह है कि हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाह जनता को तमाम ऐसे सपने दिखा कर सत्ता में आए जो कभी पूरे नहीं होने थे। शुरू में तानाशाहों का चेहरा खासा उदारवादी और लोकतांत्रिक दिखता है लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है वह उसका चेहरा और स्वभाव बदलने लगता है। तानाशाह धर्म, राष्ट्रवाद और निजीकरण की बातें ज्यादा करते हैं। तानाशाह लड़ाईयों में ज्यादा यकीन करते हैं। तानाशाह अक्सर जनता में यह प्रदर्शित करते हैं कि उसका अपना कुछ नहीं, जो भी उसका है वह राष्ट्र और उसकी जनता के लिए ही है। आज दुनिया युद्ध के जंजाल में उलझी हुई है। अमरीका और इजरायल का निर्मम चेहरा सबके सामने है। कहने के लिए अमरीका एक लोकतान्त्रिक देश है लेकिन हमेशा उसका चेहरा एक तानाशाह की भांति दिखाई पड़ता है। बहरहाल ईरान आजकल एक थोपा हुआ युद्ध लड़ रहा है। उसने वेनेजुएला की तरह समर्पण नहीं किया। अगर समर्पण कर देता तो शायद यह नौबत नहीं आती। लेकिन ईरान एक पुरानी सभ्यता है । उसकी फितरत लड़ने की है न कि आत्मसमर्पण की। इन दिनों हम यु...