अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख 'वो : जो एक दर्द धड़कता है कहीं दिल से परे' : लव इन द टाइम ऑफ कालेरा
साहित्य और सिनेमा अपने आप में अलग अलग विधाएँ होते हुए भी कहीं न कहीं एक दूसरे से अन्तरसम्बन्धित लगते हैं। इसी क्रम में कई एक कालजयी साहित्यिक कृतियों पर उम्दा फिल्में बनीं जिसने व्यापक तौर पर लोगों को प्रभावित किया। गैब्रियल गार्सिया मार्क्वेज कोलम्बिया में जन्मे ऐसे अप्रतिम रचनाकार थे जिनकी कालजयी कृतियों ने वैश्विक स्तर पर लोकप्रियता अर्जित की। उनकी एक महत्त्वपूर्ण कृति ' लव इन द टाइम ऑफ़ कॉलेरा ' पर इसी नाम से 2007 ई. में एक उम्दा फ़िल्म बनी। परदे पर 1900 ई. का दृश्यांकन है जो कालेरा महामारी का त्रासद दौर था। इस फ़िल्म में इतिहास और जीवन के साथ एक संगति दिखाई पड़ती है। कवि आलोचक अमरेन्द्र कुमार शर्मा ने इस फ़िल्म की अपने आलेख में एक गहन पड़ताल की है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है अमरेन्द्र कुमार शर्मा का आलेख ' वो : जो एक दर्द धड़कता है कहीं दिल से परे ' : लव इन द टाइम ऑफ कालेरा। ‘वो : जो एक दर्द धड़कता है कहीं दिल से परे’ [i] : लव इन द टाइम ऑफ कॉलेरा अमरेन्द्र कुमार शर्मा “उसने यह बड़ी ख़ुशी से खोज डाला था कि कोई अपने बच्चों से इसलिए प्र...