भाविनी त्रिपाठी की कहानी 'नेवले'
भाविनी त्रिपाठी भाविनी त्रिपाठी बी टेक द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं । उनमें गहरे साहित्यिक संस्कार भरे हुए हैं । उनकी कहानियाँ पढ़ कर आप सहज ही इसका अंदाजा लगा सकते हैं कि भाविनी में भविष्य का एक संभावनाशील रचनाकार संचित है । 'नेवले' कहानी के माध्यम से भाविनी ने उन तत्वों को उजागर करने की कोशिश किया है जो छुपे रुस्तम होते हैं । ऐसे लोग मौके की ताक में रहते हैं और अवसर मिलते ही अपनी क्रूरता दिखाने से नहीं चूकते । ' पहली बार' पर आप पहले भी भाविनी की कहानियाँ पढ़ चुके हैं । आइए आज हम पढ़ते हैं उनकी एक और नयी कहानी 'नेवले' । नेवले भाविनी त्रिपाठी तुम्हारा प्रथम स्पर्श अब भी स्मृति-पटल पर अंकित है... सर्वथा सुरक्षित। कैसे भुला सकती हूँ मैं उस दिन को , उस सुबह को , जब तुम आई थी , मेरे घर से अधिक मेरे दिल में। याद है मुझे जेठ की वह सुबह। आसमान साफ था। सूर्य , किसी गाँव के सबसे बूढ़े व्यक्ति की तरह , अपना तेज सब पर बरसाता , प्रकृति के कण-कण के क्रिया-कलापों का निरीक्षण कर रहा था। हवा अपने हाथों के कंगन बजाती कभी किसी पेड़ को छेड़ती तो कभी...