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देवेन्द्र मेवाड़ी आलेख ‘कायनात के काम में दखल’

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देवेन्द्र मेवाड़ी विज्ञान ने हमारी दुनिया को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। विज्ञान ने मानवीय ज्ञान और गरिमा को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। इस दुनिया का अगर कोई स्रष्टा है और अगर वह अपनी बनायी इस पृथ्वी को देखने आ जाए तो वह इसे पहचान भी नहीं पाएगा। चिकित्सा हो या शिक्षा, यातायात हो या संचार जीवन का हर क्षेत्र विज्ञान से पूरी तरह प्रभावित है। देवेन्द्र मेवाड़ी विज्ञान को आधार बना कर तर्कपूर्ण आलेख लिखते रहे हैं, जिसे पढ़ कर हमारी सोच और समझ का वितान बहुत कुछ बदल जाता है। हाल ही में कादम्बिनी के हालिया अंक में मेवाड़ी जी का एक जरुरी आलेख प्रकाशित हुआ है। हम इसे पहली बार पर साभार प्रस्तुत कर रहे हैं। आज जब लोग कुछ और अधिक धार्मिक, कह लें और अधिक संकीर्ण होते जा रहे हैं, ऐसे में मेवाड़ी जी का यह प्रयास अत्यन्त महत्वपूर्ण है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है मेवाड़ी जी का एक जरुरी आलेख ‘कायनात के काम में दखल’।                 कायनात के काम में दखल देवेंद्र मेवाड़ी मेरी कथा के रसिको! कायनात के बारे में कभी अके...

शैलेश मटियानी पर देवेन्द्र मेवाड़ी का संस्मरण 'पुण्य स्मरण : शैलेश मटियानी'

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शैलेश मटियानी इलाहाबाद के कहानीकारों में शैलेश मटियानी का नाम बड़े आदर के साथ लिया जाता है। कहानी लेखन के साथ-साथ मटियानी जी ने ‘विकल्प’ नामक साहित्यिक पत्रिका भी निकाली जिसने साहित्यिक पत्रकारिता में अहम् भूमिका निभाई। आज 24 अप्रैल को मटियानी जी की पुण्य तिथि है। इस मौके पर उन्हें नमन करते हुए हम पहली बार पर पढ़ते हैं प्रख्यात विज्ञानं कथा लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी का यह रोचक संस्मरण। ज्ञातव्य है कि देवेन्द्र जी को कुछ समय के लिए मटियानी जी का सुखद साहचर्य प्राप्त हुआ था ।                             पुण्य स्मरण : शैलेश मटियानी देवेन्द्र मेवाड़ी सन् साठ के दशक के अंतिम वर्ष थे। एम.एस-सी. करते ही दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में नौकरी लग गई। आम बोलचाल में यह पूसा इंस्टिट्यूट कहलाता है। इंस्टिट्यूट में आकर मक्का की फसल पर शोध कार्य में जुट गया। मन में कहानीकार बनने का सपना था। ‘ कहानी ’, ‘ माध्यम ’ और ‘ उत्कर्ष ’ जैसी साहित्यिक पत...