भगवानदास मोरवाल का उपन्यास अंश ‘सैय्यद इब्राहीम का ब्रज गमन’
भगवानदास मोरवाल ‘मानुष हौं तो’ वर्तमान कथा साहित्य के सर्वाधिक सक्रिय और अपने नए-नए विषयों के लिए जाने जाने वाले कथाकार भगवानदास मोरवाल का तेरहवाँ उपन्यास है, जो शीघ्र ही वाणी प्रकाशन से प्रकाशित होने जा रहा है। विदित है कि हाल में वाणी प्रकाशन से ही उनका बारहवाँ उपन्यास ‘दण्ड प्रहार’ (2025) प्रकाशित हुआ है। उनकी लेखकीय रचनात्मक को ध्यान में रखते हुए, हाल में इलाहाबाद की साहित्यिक-सांस्कृतिक संस्था ‘संचेतना’ द्वारा, प्रति वर्ष किसी रचनाकार को उसके समग्र साहित्यिक योगदान के लिए दिया जानेवाला वर्ष 2026 का ‘राजमणि देवी स्मृति साहित्य सम्मान’ 2026 उन्हें देने की घोषणा की गई है। अतीत को उसके उसी रूप में संचित करने की परम्परा सामान्य तौर पर इतिहास में प्रचलित रही है। लेकिन हमारे यहाँ उस तरह का बोध न होने की वजह से अतीत की घटनाओं या व्यक्तित्व के बारे में सुनिश्चित जानकारी नहीं मिल पाती। यही वजह है कि कबीर, सूर, तुलसी की जन्म तिथि और स्थान के बारे में आज भी एकमत नहीं है। ऐसी ही स्थिति रसखान के साथ रही है। बल्कि रसखान के बारे में संदर्भों का कहीं ज्यादा ही अकाल है। रसखान हिंदी साहित...