रामजी राय का आलेख 'अवचेतन, व्यक्तित्व विभाजन और रचनात्मकता'
मुक्तिबोध हिन्दी के ऐसे दुर्लभ कवि हैं जिनकी कविता मनोविज्ञान, तर्क और विज्ञान के मजबूत धरातल पर खड़ी है। उनकी कविताओं में कठिन शब्द बार बार आते हैं लेकिन वे कहीं भी अवरोध नहीं बनते बल्कि काव्य प्रवाह के रूप में आते हैं। हिंदी काव्य परंपरा में मुक्तिबोध ने कई नए शब्दों का समावेश किया। वास्तव में आजादी के बाद की विडंबनापूर्ण परिस्थितियों का मुक्तिबोध ने अपनी कविता में खुले तौर पर समावेश किया और इस प्रक्रिया में कठिन शब्द आने लाजिमी थे। रामजी राय मुक्तिबोध की रचनाधर्मिता के गहन अध्येता है। पहली बार पर हम पूर्व में ही राम जी राय का एक गंभीर आलेख पढ़ चुके हैं। आज उसी कड़ी का दूसरा खंड प्रस्तुत किया जा रहा है। इलाहाबाद से प्रकाशित होने वाली नियतकालिक पत्रिका 'कथा' के अंक 23 में उनका यह आलेख हाल ही में प्रकाशित हुआ है। उस आलेख का किंचित परिवर्धित एवं संशोधित रूप पहली बार के पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है। तो आइए आज पहली बार पढ़ते हैं रामजी राय का आलेख 'अवचेतन, व्यक्ति विभाजन और रचनात्मकता'। अवचेतन, व्यक्तित्व विभाजन और रचनात्मकता रामजी राय ...