नन्द किशोर आचार्य की कविताओं पर पंकज पराशर का आलेख ‘पहले दिल-ए-गुदाख़्ता पैदा करे कोई’
नन्द किशोर आचार्य पंकज पराशर युवा आलोचक और कवि हैं। कवि और कविता को समझने की जो समझ पंकज पराशर ने अर्जित किया है उससे हम हिंदी आलोचना के भविष्य के प्रति आश्वस्त हो सकते है। उर्दू शायरी के मूल तक पहुंचने का उनका हुनर उन्हे औरों से अलग करता है। नन्द किशोर आचार्य की कविता विराट अनुभव और गहन अध्ययन का संगम है। एक लम्बे समयान्तराल ने इस अनुभव और अध्ययन को वह गहराई प्रदान किया है जो उनकी कविताओं को अन्य सामयिक कवियों से अलग कर देता है। आचार्य की कविता पढ़ते हुए हमें अक्सर दर्शन का भी आस्वाद मिलता है। पंकज ने आचार्य की कविताओं की परम्परा आलोक में गहन पड़ताल किया है। हाल ही में कवि नंद किशोर आचार्य की कविताओ पर पंकज ने एक आलेख लिखा है जो मधुमति नामक पत्रिका में प्रकाशित है। आज पहली बार पर प्रस्तुत है पंकज पराशर का आलेख ‘ पहले दिल-ए-गुदाख़्ता पैदा करे कोई ’ । पहले दिल-ए-गुदाख़्ता पैदा करे कोई (संदर्भः नंद किशोर आचार्य की कविताएँ) पंकज पराशर पिछले कुछ वर्षों में जब से हिंदी में उत्तर-आधुनिकता...