प्रभा मुजुमदार की कविताएं
परिचय डॉ. प्रभा मुजुमदार जन्म: 10.04.1957, इन्दौर (म.प्र.) एम.एस-सी. पी-एच.डी.(गणित), तेल एवम प्राकृतिक गैस निगम में भूवैज्ञानिक के तौर पर 35 वर्ष कार्यकाल के बाद उपमहाप्रबंधक (तेलाशय) के पद से 2017 में सेवानिवृत। 5 कविता संग्रह ‘अपने अपने आकाश’ (2003), ‘तलाशती हूँ जमीन’ (2010), ‘अपने हस्तिनापुरों में’ (2014), “सिर्फ स्थगित होते हैं युद्ध” (2019) तथा “नकारती हूँ निर्वासन” (2025) प्रकाशित, अनेक साझा संग्रहों में प्रकाशन, कविता के अतिरिक्त छिटपुट व्यंग, आलेख, समीक्षा, कथा लेखन। प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिकाओं मे प्रकाशन। जीवन है तो संघर्ष है और संघर्ष है तो जय और पराजय है। जैसे कोई संघर्ष अन्तिम नहीं वैसे ही कोई जय या पराजय अन्तिम नहीं होती। इतिहास गवाह है कि मानव सभ्यता की शुरुआत से ही युद्ध होते रहे हैं। युद्ध में जन धन की व्यापक पैमाने पर बर्बादी होती है और अंततः युद्ध एक शांति की तलाश में रुक जाता है। लेकिन फिर परिस्थितियां कुछ ऐसी करवट लेती हैं कि पुनः तनाव बढ़ने लगता है और युद्ध फिर आरम्भ हो जाता है। इस तरह देखा जाए तो युद्ध कभी स्थगित नहीं होता। कवयित्री प्रभ...