रमेशचन्द्र शाह से शिवदयाल की बातचीत
रमेश चंद्र शाह रमेशचन्द्र शाह हिन्दी साहित्य के हरफनमौला रचनाकार हैं। साहित्य की लगभग सभी प्रमुख विधाओं में इन्होंने अपना लेखन कार्य किया। इनकी रचनाओं के मूल में दर्शन है। वह दर्शन जो हर रचना की आत्मा होती है। अलग बात है कि आज रचनाओं से दर्शन प्रायः नदारद ही दिखता है। रमेश जी का मानना है कि सामान्य व्यक्ति में भी दार्शनिक संस्कार होता है। वही दर्शन उनमें भी है। शिवदयाल जी उचित ही लिखते हैं कि 'वे भारतविद् हैं - सही अर्थों में, और भारतीय आधुनिकता के व्याख्याकार! अंततः वे एक रचनाकार हैं - सिरजनहार - नख से शिख तक तपःशील सर्जक! उन्होंने हिन्दी के सृजनात्मक एवं विचार-साहित्य को अपने असाधारण प्रतिभापूरित मौलिक लेखन से समृद्ध किया है। उनके बहुमुखी लेखन में भारत की सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता, बहुलता और बहुमुखता मुखर होती है। युग-सत्य को पकड़ने का ऐसा बहुविध, बहुपथगामी, प्राणपण से किया गया सृजनात्मक उद्यम पिछले चार-पाँच दशकों में तो नहीं दिखाई देता।' समकालीन भारतीय साहित्य के लिए शिवदयाल जी ने रमेश जी से 2019 में एक लम्बा साक्षात्कार लिया था। आज भी यह ...