विवेक निराला की कविताएँ
समकालीन कवियों में विवेक निराला अपने अलग शिल्प और सांगीतिक भाषा के लिए विशेष तौर पर जाने जाते हैं। ‘एक बिम्ब है यह’ उनका पहला कविता संग्रह था। एक अरसे बाद राजकमल प्रकाशन से विवेक का दूसरा कविता संग्रह ‘ध्रुव तारा जल में’ प्रकाशित हुआ है। कवि को बधाई देते हुए हम प्रस्तुत कर रहे हैं कवि के इस नए संकलन की कुछ चुनिन्दा कविताएँ। तो आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं कवि विवेक निराला की कविताएँ । विवेक निराला की कविताएँ भाषा मेरी पीठ पर टिकी एक नन्हीं सी लड़की मेरी गर्दन में अपने हाथ डाले हुए जितना सीख कर आती है उतना मुझे सिखाती है। उतने में ही अपना सब कुछ कह जाती है। पासवर्ड मेरे पिता के पिता के पिता के पास कोई संपत्ति नहीं थी। मेरे पिता के पिता को अपने पिता का वारिस अपने को सिद्ध करने के लिए भी मुक़द्दमा लड़ना पड़ा था। मेरे पिता के पिता के पास एक हारमोनियम था जिसके स्वर उसकी निजी संपत्ति थे। मेरे पिता के पास उनकी निजी नौकरी थी उस नौकरी के निजी सुख-दुःख थे। मेरी भी निजता ...