गौतम राजरिशी का आलेख 'कविता की कॉन्सपिरेसी थ्योरी'
गौतम राजरिशी युवा कवि गौतम राजरिशी ने कविता के संदर्भ में कई एक महत्वपूर्ण पाठकीय सवाल उठाए हैं। गौरतलब है कि गौतम ने अपने आलेख का शीर्षक ही दिया है 'कविता की कॉन्सपिरेसी थ्योरी'। इस आलेख में जहाँ एक तरफ मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ कविता की दुर्बोधता के समक्ष राजकमल चौधरी की महत्वपूर्ण कविता ‘मुक्ति प्रसंग’ की अवहेलना किए जाने का प्रसंग है वहीं दूसरी तरफ 'लांग नाईनटीज' के शोरोगुल पर भी बेबाक टिप्पणी है। आइए आज पहली बार पर पढ़ते हैं गौतम राजरिशी का यह आलेख। इस आलेख/ टिप्पणी पर आपकी पाठकीय टिप्पणियों/ सहमतियों/ असहमतियों का स्वागत है। कविता की कॉन्सपिरेसी थ्योरी गौतम राजरिशी अब अभिव्यक्ति के सारे ख़तरे उठाने ही होंगे तोड़ने ही होंगे मठ और गढ़ सब... मुक्तिबोध की लिखी ये पंक्तियाँ , जो उनकी ख्यात कविता “अँधेरे में” का हिस्सा हैं , शायद सबसे ज़्यादा उद्धृत की जाने वाले काव्य-पंक्तियों में शुमार किए जाने का रौब गाँठती हैं ...