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कालूलाल कुलमी की समीक्षा 'जला दो शाखों पर दीये अब चाँद पर एतबार खोने लगा है'

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  कविता जीवन से गहरे तौर पर जुड़ी होती है। इसीलिए अनुभव इसके मूल में होते हैं। यह अनुभव अपने आस पास के वातावरण, परिस्थितियों, व्यक्ति, विचार आदि से जुड़ा होता है इसलिए इसका संदर्भ व्यापक होता है। इसी क्रम में आपबीती जगबीती में तब्दील हो जाती है। कवि सुनील कुमार शर्मा का काव्य सन्दर्भ व्यापक है। हाल ही में इनका पहला कविता कविता संग्रह 'हद या अनहद' वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली से प्रकाशित हुआ है। इस संग्रह की एक समीक्षा की है युवा आलोचक कालूलाल कुलमी ने। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं  कवि सुनील कुमार शर्मा के कविता संग्रह 'हद या अनहद' पर कालू लाल कुलमी की समीक्षा 'जला दो शाखों पर दीए अब चांद पर एतबार खोने लगा है'। 'जला दो शाखों पर दीये अब चाँद पर एतबार खोने लगा है'                                                             कालूलाल कुलमी  कोई भी अच्छा कवि किसी भी आलोचक की गिरफ़्त में पूरा नहीं आता।    ...