निज़ार कब्बानी की कविताएँ, अनुवाद : श्री विलास सिंह
निज़ार कब्बानी कविता वस्तुतः जीवन की परिभाषा होती है। जीवन जो संघर्षों से भरा होता है, जीवन जो प्रतिरोध के गीत रचता है, कविता उसे अपना स्वर प्रदान करती है। प्रेम के कवि निजार जब 15 वर्ष के थे, तभी घर पर घटी एक घटना ने उनके जीवन और काव्य कर्म को ही बदल कर रख दिया। दरअसल उनकी बहन की शादी जबरन काफी बड़ी उम्र के एक व्यक्ति के साथ की जाने लगी तो बहन ने विरोधस्वरुप आत्महत्या कर लिया। इस घटना से गहरे तौर पर प्रभावित निज़ार आजीवन स्त्री अनुभूतियों को आवाज देने की कोशिश करते रहे। अरबी समाज जहाँ महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है , पर टिप्पणी करते हुए निज़ार ने कहा ' अरबी समाज में प्रेम एक कैदी जैसा है और मैं इसको आजाद कर देना चाहता हूँ। मैं अपनी कविता के माध्यम से अरबी आत्मा , संवेदना और शरीर को मुक्ति की राह पर ले जाना चाहता हूँ। ' निज़ार यह काम आजीवन करते रहे। उनकी कविताओं के मूल में प्रेम और प्रतिरोध है। श्रीविलास सिंह ने विश्व के महत्त्वपूर्ण कवियों की कविताओं का उम्दा अनुवाद किया है। पहली बार के लिए काफी पहले उन्होंने यह अनुवाद उपलब्ध कराया...