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अनिल कुमार राय का आलेख 'कवि के विचार गद्य में समय और साहित्य'

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केदार नाथ सिंह केदार नाथ सिंह न केवल अपने समय के शीर्ष कवि रहे हैं बल्कि उन्होंने हिन्दी साहित्य के चिन्तन पक्ष पर भी शिद्दत से विचार किया है। केदार जी का गद्य पढ़ते हुए हमें काव्यात्मक अनुभूति होती है। कहीं कोई बोझिलता या जटिलता नहीं। वे कठिन से कठिन बात यहाँ तक कि दर्शन की बात तक को आम बोल चाल की भाषा में लिख देने वाले कलमकार रहे हैं। केदार जी के विचार गद्य पर एक महत्वपूर्ण आलेख लिखा है प्रोफेसर अनिल राय ने। यह आलेख साखी के केदार नाथ सिंह विशेषांक में प्रकाशित हुआ है। आज 19 नवम्बर को केदार जी का जन्म दिन है। केदार जी को नमन करते हुए आज पहली बार पर प्रस्तुत है अनिल कुमार राय का आलेख ' कवि के विचार गद्य में समय और साहित्य ' ।                       कवि के विचार-गद्य में समय और साहित्य     अनिल कुमार राय         केदार नाथ सिंह के साहित्य–विषयक विचार-गद्य के सम्बन्ध में साहित्य के अध्येताओं के मन में एक स्वाभ...

अनिल राय का आलेख 'अक्टूबर क्रान्ति की आरम्भिक प्रेरणाएँ और हिन्दी के कुछ वैचारिक पृष्ठ'

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दुनिया हमेशा एक क्रमिक विकास के चरण से गुजरती रहती है। मानव ने अपने विकास के क्रम में सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक से ले कर राजनीतिक विकास की नयी अवधारणाएं विकसित कीं और इस दुनिया को कुछ और बेहतर बनाने का प्रयास किया। राजनीतिक तौर पर हम राजतंत्रात्मक शासन, सामन्तवादी शासन से हो कर लोकतान्त्रिक शासन की व्यवस्थाओं से रु-बरु हुए। इन सबमें कुछ न कुछ खामियाँ दिखाई पडीं और जनता का शोषण चक्र अबाध चलता रहा। लोकतान्त्रिक शासन को पूंजीवादियों ने अपनी तरह से नियन्त्रित करने का न केवल प्रयास किया बल्कि वे इसमें सफल भी रहे। उन्नीसवीं सदी के महान विचारक कार्ल मार्क्स ने इसी क्रम में समाजवादी शासन की अवधारणा सामने प्रस्तुत की। इस अवधारणा में राज्य का शासन सर्वहारा वर्ग द्वारा परिचालित होने की परिकल्पना की गयी थी। 1917 की बोल्शेविक क्रांति ने इसे यथार्थ रूप दिया और इस क्रांति का नेतृत्व करते हुए महान क्रान्तिकारी लेनिन ने दुनिया के सबसे बड़े देश रूस में ज़ार के अत्याचारी शासन का ख़ात्मा कर मजदूरों के शासन की नीव रखी। इसी नीव पर सोवियत संघ का आगे चल कर निर्माण हुआ जिसने इस दुनिया को मानवीय बनाने ...