शंभूनाथ शुक्ल का संस्मरण 'कुंभ में फ़ूड कोर्ट देख कर लगा मेला नहीं यह माल है'
शंभूनाथ शुक्ल इलाहाबाद के महाकुम्भ के आयोजन में सभी शरीक होना चाहते हैं। सरकार का आंकलन है कि इस मेले में लगभग पचास करोड़ लोग शामिल होंगे। यह कल्पना ही की जा सकती है कि जब एक शहर की तरफ करोड़ों लोग एक साथ चल पड़ें तब उस शहर का हाल क्या होगा। सारी व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। मेले के साथ साथ शहर तो आजकल अस्त व्यस्त है ही, शहर की तरफ जाने वाले रास्तों पर गाड़ियों का सैकड़ों किलोमीटर तक लगा जाम हालात को खुद ही बयां कर देता है। उस पर दिक्कत यह कि हमारे यहां इस तरह की कोई अवधारणा ही नहीं कि सड़कों के किनारे आम यात्रियों के लिए आधारभूत सुविधाएं तक उपलब्ध कराई जा सके। आलम यह है कि लोगों के पास जेब में रुपए तो हैं, लेकिन खाने की सामग्रियों का अभाव है। लेकिन जाने माने पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल ने भी कानपुर से सड़क मार्ग के जरिए इलाहाबाद की यात्रा की। इस यात्रा के दौरान उनके जो अनुभव हैं, वह इस सिलसिले में काफी महत्त्वपूर्ण हैं। भविष्य में होने वाले इस तरह के आयोजनों के समय मार्गों पर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के सन्दर्भ में प्रयास किया जाना चाहिए। तभी सच्चे मायने में कोई भी आयोजन सफल कहा जा स...