लाल बहादुर वर्मा पर कविताएं
लाल बहादुर वर्मा अपने आप में एक विरल व्यक्तित्व थे प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा। इतिहास का बोध कराने वाले अकेले साधक जो ता उम्र अपने काम में एक मजदूर की तरह निरन्तर जुटे रहे। उनका मानना था कि मार्क्सवाद सिर्फ रोजी-रोटी की लड़ाई नहीं है बल्कि यह मानव जीवन को सुंदर बनाने की जद्दोजहद है। इस जद्दोजहद में वे कुछ भी कर गुजरने के लिए प्रतिबद्ध थे। सहजता और सहृदयता उनकी पूंजी थी। वे नाम के नहीं बल्कि सचमुच के प्रोफेसर थे। इसके बावजूद वे लाल बहादुर कहलाया जाना ही अधिक पसन्द करते थे। वे वह दुनिया चाहते थे जो वास्तविक अर्थों में खूबसूरत हो। जिंदगी भर दुनिया को खूबसूरत बनाने के लिए लगे रहे। आजीवन यह सपना देखते रहे और अन्ततः इस सपने के साथ ही उन्होंने अपनी अन्तिम सांस ली। इतिहास विषय पर उन्होंने कुछ मौलिक पुस्तकें लिखीं और 'इतिहास बोध' जैसी पत्रिका का सम्पादन किया। इतिहास को साहित्य से जोड़ कर देखे जाने और मौखिक इतिहास पर बल देने वाले इतिहासकार थे। उनका मूल्यांकन किया जाना आज भी बाकी है। बीते 10 जनवरी को लाल बहादुर जी का जन्मदिन था। हम उनकी स्मृति ...