आशीष सिंह का आलेख 'कथाकार इब्राहीम शरीफ'
रचना की दुनिया बहुत बड़ी होती है। एक ही समय में अनेक रचनाकार अपनी रचनाओं से उस समय के साहित्य को समृद्ध कर रहे होते हैं। लेकिन समय की धारा कुछ ऐसी होती है कि कई महत्त्वपूर्ण रचनाकार गुमनामी में खो जाते हैं। इब्राहिम शरीफ ऐसे ही रचनाकार रहे हैं जिन्होंने कई महत्वपूर्ण कहानियां लिखीं। समांतर कहानी आंदोलन में उनकी भूमिका अहम रही है। बावजूद इसके उनके लेखन की वैसी चर्चा नहीं हो सकी, उनकी रचनाएं जिसकी हकदार थीं। युवा आलोचक आशीष सिंह ने इब्राहिम शरीफ के लेखन को रेखांकित करने की कोशिश की है। ऐसे रचनाकारों को 'जिन्हें हम भूल गये' कालम के अंतर्गत रेखांकित करने की कोशिश करेंगे। आइए आज पहली बार पढ़ते हैं आशीष सिंह का आलेख 'कथाकार इब्राहीम शरीफ'। जिन्हें हम भूल गये कथाकार इब्राहीम शरीफ आशीष सिंह एक कहानीकार के तौर पर इब्राहीम शरीफ को हम कुल जमा 'जमीन का आखिरी टुकड़ा' के कहानीकार के तौर पर ही जानते हैं। उनकी तमाम कहानियों व 'अंंधेरे के साथ' जैसे उपन्यास से हमारी पीढ़ी के पाठक लगभग अपरिचित ही हैं। 'कई सूरजों के बीच' का यह कहानीकार 'अ...