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सुरजीत मजूमदार का वक्तव्य 'भूमंडलीकरण के बाद की आर्थिक प्रक्रियाएं और अमेरिकन पूँजी'

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सुरजीत मजूमदार विविधताएं किसे नहीं सुहाती। विविधताओं से भरी हुई अपनी यह धरती खूबसूरत दिखती है। बोली, भाषा, संस्कृति, धर्म, नस्ल आदि विविधताओं से भरी यह दुनिया अपने आप में नायाब है। लेकिन कुछ शक्तियों के लिए यह बर्दाश्त नहीं कि दुनिया अपनी मर्जी से चले। ये ताकतवर शक्तियाँ चाहती हैं कि उनकी मर्जी के बिना पत्ता तक न हिले। वे अपनी भाषा, बोली, धर्म और मुद्रा तक का वर्चस्व पूरी दुनिया पर चाहती हैं। अमरीका इन शक्तियों का सरगना है।  शीत युद्ध की समाप्ति के बाद विश्व स्तर पर अमेरिका का प्रभुत्व बढ़ा। इसके बाद भूमंडलीकरण की ज़मीन तैयार की गई Washington Consensus (WC) के जरिए। वाशिंगटन कंसेंसस, यानी अमेरिका के वाशिंगटन शहर में स्थित तीन संस्थाओं — ‘विश्व बैंक’, ‘अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष’ और ‘यू.एस. ट्रेज़री’ — द्वारा सुझाए गए दस नवउदारवादी आर्थिक नीतियों के फ़ॉर्मूले ने निजीकरण, मुक्त व्यापार, टैक्स सुधार और डी-रेगुलराइजेशन की वकालत की और पूरी दुनिया को भूमंडलीकरण के जाल में बुरी तरह उलझा दिया।  लेकिन अब महाशक्ति के तौर पर उसका आसन डोलने लगा है। चीन की शक्ति की आहट को अब सब महसूस क...

प्रतुल जोशी का यात्रा वृत्तांत 'मुम्बई से गोवा'

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गोवा में प्रतुल जोशी मनुष्य जन्मजात घुमक्कड़ प्राणी है। सहज रूप में उसे उन जगहों के बारे में जानने की जिज्ञासा होती है, जो उसके आस पास या दूर दराज हैं। जानने की इस प्रवृत्ति की वजह से ही अमरीका यानी नई दुनिया की खोज हुई। यूरोप से भारत आने के जलमार्ग की खोज हुई। आज कई देशों की आय का एक बड़ा साधन यह पर्यटन ही है। हमारा भारत अपने आप में तमाम विविधताओं वाला देश है। इसीलिए इसे देशों का देश भी कहा जाता है। हालांकि विकास के नाम पर आज हम इन जगहों की कुदरती खूबसूरती को नष्ट करते जा रहे हैं फिर भी हमारे  यहां घूमने फिरने की तमाम जगहें अभी भी बची हुई हैं। आमतौर पर पर्यटन हमारे उत्तर भारत के लोगों की प्रवृत्ति नहीं। आम जनता इसे आज तक खाए अघाए लोगों का उपक्रम ही मानती रही है। बहरहाल हरेक यात्रा वृत्तांत अपने आप में बहुत कुछ समेटे होता है। उसमें इतिहास के साथ वर्तमान भी होता है। भूगोल के साथ राजनीति भी होती है। प्रकृति के साथ सामाजिकता भी शामिल होती है। राहुल जी तो कहा ही करते थे : 'सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ/ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ'। वे आजीवन घुमक्कड़ी करते...