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सुशील कुमार का यह समालोचनात्मक आलेख 'जनवाद का एक धूमिल युवा चेहरा'

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अरविन्द श्रीवास्तव कवि सुशील कुमार ने इधर कई समालोचनात्मक आलेख लिख कर गद्य के क्षेत्र में भी ध्यान आकृष्ट किया है। अपने ही   एक समकालीन कवि अरविन्द श्रीवास्तव की कविता पर सुशील कुमार का समालोचनात्मक लेख गद्य पर उनके पकड की बानगी प्रस्तुत करता है। अपने इस आलेख में सुशील कुमार ने आलोच्य कवि की खूबियों के साथ-साथ उसकी सीमाओं पर भी बात किया है , जो आजकल चलन से बाहर होता जा रहा है। तो आइए आज पढ़ते हैं सुशील कुमार का यह समालोचनात्मक आलेख ।       जनवाद का एक धूमिल युवा चेहरा                                           सुशील कुमार अ रविन्द श्रीवास्तव की कविता ओं में कवि का बेबाकीपन भाषा के बाँकपन की उस हद से गुजरता है जो उनकी अभिव्यक्ति को न केवल बेलौस और उनके कथ्य को रोचक बनाता है , बल्कि कविता की अंतर्वस्तु में निहित आंतर...