नीलिमा पाण्डेय का आलेख 'मार्कण्डेय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व'
मार्कण्डेय जी नयी कहानी आन्दोलन के पुरोधाओं में से एक मार्कण्डेय का व्यक्तित्व बहुआयामी था । एक बेहतर कहानीकार होने के साथ-साथ वे एक बेहतर व्यक्तित्व के मालिक भी थे । उनकी विनम्रता के हम सब कायल थे । जो भी उन्हें जानते हैं इस बात से परिचित होंगे कि अंतिम समय तक वे किसी भी आगंतुक की ख़ुद अगवानी करते थे । अपने हाथों से लड्डू, बिस्कुट खिलाते थे और चाय पिलाते थे । किसी अपरिचित से भी वे तुरंत ही कुछ इस तरह घुल-मिल जाते थे जैसे वो उनका बहुत पुराना परिचित हो । इसके बाद सिलसिलेवार बातों का जो क्रम आरम्भ होता तो खत्म होने का नाम नहीं लेता था । उनके पास बैठने पर समय कैसे बीत जाता था हमें पता ही नहीं चलता था । ऐसे अपने मार्कण्डेय दादा की पुण्यतिथि के अवसर पर हम प्रस्तुत कर रहे हैं नीलिमा पाण्डेय का आलेख ' मार्कण्डेय : व्यक्तित्व एवं कृतित्व' मार्कण्डेय: व्यक्तित्व एवं कृतित्व नीलिमा पाण्डेय मार्कण्डेय का जन्म 2 मई, 1930 ई0 को उत्तर प्रदेश के जनपद जौनपुर के अन्तर्गत केराकत तहसील के एक गाँव बराई में एक सम्पन्न किसान परिवार में हुआ। पित...