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रामजी तिवारी का यात्रा वृत्तांत 'सुदूर पूर्वोत्तर से'

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  रामजी तिवारी  'सेवेन सिस्टर्स' भारत का वह क्षेत्र है, जहां आज भी प्रकृति अपने वास्तविक स्वरूप में दिख जाती है। वैसे भी पर्यटकों का आकर्षण जम्मू कश्मीर, राजस्थान या दक्षिण के राज्य होते हैं। लेकिन पूर्वोत्तर आज भी इस आकर्षण से थोड़ा बचा हुआ है। रामजी तिवारी पर्यावरण की दृष्टि से अगर पूर्वोत्तर को भारत का फेफड़ा कहते हैं तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं। यायावरी भी एक शगल है। यह सबके बस की बात नहीं। लेकिन रामजी तिवारी तो जैसे यायावरी को जीते हैं। अभी कुछ ही दिन पहले बुंदेलखंड गए थे, फिर वे पूर्वोत्तर की यात्रा पर चले गए। और आज जब उनकी यह पोस्ट लगा रहा हूं, वे तमिलनाडु घूम रहे हैं। घर, परिवार और नौकरी के साथ वे यायावरी का सन्तुलन सहज ही स्थापित कर लेते हैं। बहरहाल हमने उनसे आग्रह किया कि वे पूर्वोत्तर का यात्रा वृत्तान्त पहली बार के लिए भेजें। थोड़े टाल मटोल के पश्चात उन्होंने आखिरकार यह यात्रा वृत्तान्त हमें उपलब्ध करा दिया। इस वृत्तांत से हमें पूर्वोत्तर के कई ऐसे पहलुओं के बारे में जानकारी मिलती है जो सर्वथा नई हैं। अपने वृत्तांत में रामजी लिखते हैं  "अरुणाचल में प्रव...

रामजी तिवारी की समीक्षा “जो घूमा नहीं, वो फला नहीं .....”

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इस दुनिया को समझने में यायावरी का बडा हाथ रहा है। मनुष्य स्वभावतः घुमक्कड होता है। आज भी उसकी यह यायावरी और घुमक्कडी जारी है और जारी है इनकी निगाहों से इस दुनिया को जानने समझने का क्रम भी। अजय सोडानी और उमेश पंत की इस घुमक्कडी पर हाल में नयी किताब आयी है जिसे देखा पढा है एक और घुमक्कड रामजी तिवारी ने। आज पहली बार पर आप सबके लिये प्रस्तुत है रामजी तिवारी की समीक्षा “जो घूमा नहीं, वो फला नहीं .....”।                                      “जो घूमा नहीं, वो फला नहीं .....” रामजी तिवारी   किसी भी व्यक्ति के जीवन में परिवार, समाज और शिक्षा का योगदान सबसे अधिक माना जाता है। इनके बाद यदि तीन और चीजों को चुनने की मुझे स्वतंत्रता दी जाए तो मैं साहित्य, सिनेमा और यात्राओं की भूमिका को रेखांकित करना चाहूँगा । क्योंकि साहित्य न सिर्फ सभी प्रकार की रचनात्मकताओं से प्रेम करना सिखाता है वरन यह विवेक भी देता है कि रचनात्मकता का...