कोकार्दा सावित्री की इंडोनेशियाई कहानी 'कोख', हिन्दी अनुवाद - श्रीविलास सिंह
कोकार्दा सावित्री सरकारों के खिलाफ अक्सर उनके देश में ही कोई न कोई आन्दोलन या विद्रोह चलते रहते हैं। इस क्रम में उसे किसी छोटी से छोटी बात में भी षड्यंत्र महसूस होने लगता है। और अगर सरकार को ऐसा महसूस हो गया तो उस व्यक्ति के प्रति की जाने वाली करवाई का अनुमान भर लगाया जा सकता है। आज पहली बार प्रस्तुत है कोकार्दा सावित्री की इंडोनेशियाई कहानी ' कोख ' । इस कहानी को हिन्दी में अनुवादित किया है श्रीविलास सिंह ने। उन्होंने इसका अनुवाद जान एच. मैकग्लेन के अंग्रेजी अनुवाद से किया है। कोख कोकार्दा ( कोक ) सावित्री ( इंडोनेशियन कहानी जॉन एच मैकग्लेन के अंग्रेजी अनुवाद से ) हिंदी अनुवाद : श्रीविलास सिंह मेरा नाम नागरी है। उम्र तीस वर्ष। स्पष्टीकरण देने की कोई आवश्यकता नहीं ; जैसा मैं समझती हूँ। ..... उस रात , स्नान के बाद मेरे बाल अभी गीले ही थे , जब मैंने अपने किराये के कमरे के दरवाज़े पर जोर की दस्तक की आवाज़ सुनी। तीन...