मैनेजर पाण्डेय का आलेख क्या आपने 'वज्र-सूची' का नाम सुना है?
प्राचीन भारतीय व्यवस्था में जो विसंगतियां थीं, उन पर प्रहार किए जाने की एक सशक्त परंपरा मिलती है। इसी क्रम में वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था पर कड़े प्रहार किए गए। इस क्रम में अश्वघोष की 'वज्र सूची' एक ऐसा महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ है, जिसमें तार्किक तरीके से उन अतार्किक परंपराओं पर प्रहार किया गया है जो भारतीय समाज व्यवस्था को क्षति पहुंचाने वाली थी। दुर्भाग्यवश 'वज्र-सूची' का हिन्दी में केवल एक अनुवाद मिलता है। यह अनुवाद किसी जनवादी या मार्क्सवादी लेखक द्वारा नहीं, बल्कि संस्कृत के एक विद्वान रामायण प्रसाद द्विवेदी के प्रयत्न से सम्भव हो पाया। लगभग दो हजार वर्ष पहले 'वज्र-सूची' की रचना हुई थी, लेकिन वह आज भी जाति प्रथा के विरुद्ध संघर्ष के लिए अत्यंत जरूरी और प्रेरणादायक रचना है। इस ग्रन्थ पर एक महत्त्वपूर्ण आलेख प्रख्यात आलोचक मैनेजर पाण्डेय ने लिखा है। यह आलेख एन. बी. टी. द्वारा मैनेजर पाण्डेय के 'संकलित निबन्ध' पुस्तक से साभार लिया गया है। कल मैनेजर पाण्डेय का निधन हो गया। उनकी स्मृति को नमन करते हुए आइए आज हम पहली बार पर पढ़ते हैं उन्हीं का एक बेजोड...