प्रेम कुमार मणि का आलेख 'मेरी दृष्टि में राधाकृष्णन'
सर्वपल्ली राधाकृष्णन 'मेरी दृष्टि में राधाकृष्णन' प्रेम कुमार मणि बचपन से 5 सितम्बर को शिक्षक दिवस का स्वाँग देखता रहा हूँ। जब विद्यार्थी था तब इस अवसर पर शिक्षकों के कल्याण के लिए एक कोश इकट्ठा किया जाता था। यह सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन है। इस अवसर पर स्कूलों में कुछ आयोजन किया जाता था। वह महान हैं के पाठ सुनते-सुनते हमारी पीढ़ी ऊब गई थी। जब कॉलेज में पहुंचा तब इनके बारे में कुछ विशेष जाना। कुछ पढ़ा भी इनका लिखा। मेरे गुरु भिक्षु जगदीश काश्यप जी थे। राधाकृष्णन उनके मित्र थे। उनसे एक बार चर्चा की और अनुरोध किया कि राधाकृष्णन जी के बारे में कुछ बतावें। वह हँस कर टाल गये। उनकी किताब 'इण्डियन फिलॉसफी' पढ़ने के लिए कहा। उनकी एक किताब 'उपनिषदों की भूमिका' मैंने हिन्दी में पढ़ी थी। वह आकर्षक लगी थी। 'इण्डियन फिलॉसफी' के बारे में भी बहुत सुना था। लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उस में कुछ विशेष नहीं दिखा। संभव है अधिक समझने का सामर्थ्य मुझ में नहीं रहा होगा। हाँ, जब वह किताब छपी थी तो इस विषय पर एक कायदे की किताब रही होगी। राहुल जी ने अपनी किताब 'दर्शन-...