विनय सौरभ की कविताएं
विनय सौरभ इसे समय का दबाव कहा जाए या धारा में बह जाने की विवशता, कि एक लम्बे अरसे बाद मिले कवि दोस्त के पास तब भी जल्दबाजी थी, जब उसका मित्र उससे दो चार बातें या कुछ पल बिताना चाहता था। किसी से भी पूछने पर इस बात का अंदाजा हम लगा सकते हैं कि इस समय का सूत्र वाक्य बन गया है कि 'हमारे पास समय नहीं है।' हम मोबाइल पर घंटों बात कर सकते हैं। हम निरर्थक काम में महीनों बिता सकते हैं लेकिन अपनों के लिए हमारे पास कोई समय नहीं। अपने मतलब घर परिवार के लोग भी होते हैं। अपने मतलब मां पिता भी होते हैं। मनुष्य जिसकी बनावट में इस सामूहिकता का बड़ा हाथ रहा है, अब लगातार एकाकी होता जा रहा है। ऐसा ही रहा तो क्या हम मनुष्य रह पाएंगे। आज जो हृदयहीनता और निर्ममता दिखाई पड़ रही है उसमें इस समय न होने का बड़ा हाथ है। कवि विनय सौरभ की कविताओं में ऐसे ही दुर्लभ प्रसंग दिखाई पड़ते हैं। इन कविताओं का आस्वाद इन्हें पढ़ कर ही जाना जा सकता है। पहली बार पर यह विनय की कविताओं का आगाज है। कवि का स्वागत करते हुए आइए आज हम पहली बार पर पढ़ते हैं विनय सौरभ की कुछ नई कविताएं। विनय सौरभ की कविताएं उनका लौटना ...