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युद्ध के विरुद्ध कविता : 3, टेरी एरेट की कविता फ़ासीवाद जब आएगा

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Terry Ehret फासीवाद, नाजीवाद मूलतः एक प्रवृत्ति है। जरूरी नहीं कि तानाशाह शासक शुरू में तानाशाह जैसा ही दिखे। इतिहास गवाह है कि हिटलर और मुसोलिनी जैसे तानाशाह जनता को तमाम ऐसे सपने दिखा कर सत्ता में आए जो कभी पूरे नहीं होने थे। शुरू में तानाशाहों का चेहरा खासा उदारवादी और लोकतांत्रिक दिखता है लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है वह उसका चेहरा और स्वभाव बदलने लगता है। तानाशाह धर्म, राष्ट्रवाद और निजीकरण की बातें ज्यादा करते हैं। तानाशाह लड़ाईयों में ज्यादा यकीन करते हैं। तानाशाह अक्सर जनता में यह प्रदर्शित करते हैं कि उसका अपना कुछ नहीं, जो भी उसका है वह राष्ट्र और उसकी जनता के लिए ही है। आज दुनिया युद्ध के जंजाल में उलझी हुई है। अमरीका और इजरायल का निर्मम चेहरा सबके सामने है। कहने के लिए अमरीका एक लोकतान्त्रिक देश है लेकिन हमेशा उसका चेहरा एक तानाशाह की भांति दिखाई पड़ता है। बहरहाल ईरान आजकल एक थोपा हुआ युद्ध लड़ रहा है। उसने वेनेजुएला की तरह समर्पण नहीं किया। अगर समर्पण कर देता तो शायद यह नौबत नहीं आती। लेकिन ईरान एक पुरानी सभ्यता है । उसकी फितरत लड़ने की है न कि आत्मसमर्पण की। इन दिनों हम यु...