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युद्ध के विरुद्ध कविता : 2, मोहम्मद मूसा की कविताएँ

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मोहम्मद मूसा युद्ध प्रायः इसीलिए किए जाते हैं ताकि समस्या का समाधान निकाला जा सके। यह अलग बात है कि युद्ध कोई अन्तिम समाधान नहीं निकाल पाता। अगर ऐसा होता तो दुनिया को आज युद्धों की जरूरत ही नहीं पड़ती। सच तो यह है कि हरेक युद्ध अपने होने के साथ ही अगले युद्ध का बीजारोपण कर देता है। इस तरह देखा जाए तो हमारा इतिहास युद्धों का ही इतिहास है। इस तरह कोई भी युद्ध अन्तिम नहीं होता। गाजा के कवि मोहम्मद मूसा अपनी कविता में उचित ही लिखते हैं : 'यह युद्ध न तो कोई दिशा-सूचक है,/ न ही डूबते हुओं की आवाज़।' आजकल यह दुनिया एक बार फिर युद्धमय है। हम इस युद्ध के खिलाफ दुनिया में उठती हुई आवाजों में अपनी एक फुसफुसाती हुई आवाज के साथ हैं। कल हमने हरीश चन्द्र पाण्डे की कविता प्रस्तुत किया था। आज एक और कवि मोहम्मद मूसा की कविताएँ। तो आइए युद्ध के विरुद्ध कविता के क्रम में आज हम पढ़ते हैं  मोहम्मद मूसा की कविताएँ। युद्ध के विरुद्ध कविता : 2 मोहम्मद मूसा की कविताएँ अंग्रेजी से अनुवाद : भास्कर चौधरी  यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध आख़िरी नहीं ​यह युद्ध तुम्हारे जीवन का आख़िरी अध्याय नहीं, न ही ...

भास्कर चौधरी की कविताएँ

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भास्कर चौधरी अपने समय की विडम्बनाओं को उजागर करना और इस क्रम में खुद अपने को खड़ा करना आसान काम नहीं होता. कवि अपने हुनर के जरिए इस कठिन काम को आसान बनाता है. भास्कर चौधरी आज के दौर के सुपरिचित कवियों में से एक हैं.उनकी नजर उन क्षेत्रों की तरफ भी जाती है जिस तरफ आम तौर पर कवियों का ध्यान प्रायः नहीं जाता. इसी क्रम में भास्कर लिखते हैं -     कवि!/ ये कैसी अंधेरगर्दी है जो/ तुम वह सब कुछ करते हो/ अंधेरे में/ जो तुम उजाले में करने से डरते हो/ हाँ तुम उजाले में रह कर उजले लिबास में/ अंधेरे के बारे में कविता रचते हो/ और इस समय को/ अंधेरा समय कहते हो!! आज पहली बार पर प्रस्तुत है भास्कर चौधरी की कविताएँ.         भास्कर चौधरी की कविताएँ   मध्यमवर्गीय कवि   मध्यमवर्गीय कवि कुकुरमुत्ते की तरह नहीं उगते घूरे में न उनका घूरे से कोई वास्ता होता है मध्यमवर्गीय कवि   तारों की तरह   भी नहीं जो टिमटिमाते हैं आकाश में   मछुवारों के लिए दिक्सूचक ...