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नीलाक्षी सिंह के उपन्यास ‘हुकुम देश का इक्का खोटा’ पर यतीश कुमार की समीक्षा 'पटरी अतीत का सबसे सुंदर शब्द है।'

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  नीलाक्षी सिंह साहित्य की एक महत्त्वपूर्ण विधा है संस्मरण। संस्मरण जिनसे हो कर रचनाकार उन घटनाओं और परिस्थितियों को याद करता है जो उसका हो कर भी महज उसका नहीं होता। एक पाठक के रूप में जब हम उस संस्मरण से दो चार होते हैं तो उसमें खुद को भी पाते हैं। यही किसी संस्मरण की सफलता भी है। लेकिन जब यह संस्मरण किसी अन्य विधा के साथ जुड़ कर सामने आता है तो उसकी तासीर कुछ अलग ही हो जाती है। वैसे भी नीलाक्षी सिंह अपनी रचनाओं में प्रयोगधार्मिता के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में चर्चित कथाकार नीलाक्षी सिंह का उपन्यास आया है 'हुकुम देश का इक्का खोटा’। इस उपन्यास पर एक महत्त्वपूर्ण समीक्षा लिखी है कवि यतीश कुमार ने। यतीश स्वयं एक उम्दा रचनाकार हैं। गजब का पढ़ाकूपन उनके स्वभाव में है। आज यतीश कुमार का जन्मदिन भी है। पहली बार की तरफ से उन्हें जन्मदिन की ढेर सारी बधाई एवम शुभकामनाएं। तो आइए आज पहली बार पर हम पढ़ते हैं नीलाक्षी सिंह के उपन्यास ‘हुकुम देश का इक्का खोटा’ पर यतीश कुमार की समीक्षा 'पटरी अतीत का सबसे सुंदर शब्द है।' पटरी अतीत का सबसे सुंदर शब्द है   यतीश कुमार ...

नीलाक्षी सिंह के उपन्यास 'खेला' पर चन्द्रकला त्रिपाठी की समीक्षा।

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  जैसे जैसे विज्ञान और तकनीक का विकास हुआ है, वैसे वैसे मानव जीवन की जटिलताएं भी बढ़ी हैं। ये तकनीकी विकास समृद्धतम लोगों के औजार बन कर रह गए और मानव का जीवन भूख और दुःख से भरा रहा। इसी क्रम में दुनिया के विकसित माने जाने वाले देशों ने खुद अपने को ही सभ्य और सुसंस्कृत मान कर उस दुनिया का शोषण आरम्भ कर दिया जो तकनीकी विकास में पिछड़ा हुआ था। जब पेट्रोल के रहस्य से पर्दा उठा तब कच्चे तेल के भण्डार पर आधिपत्य को ले कर इन ताकतवर देशों ने अपना असली करतब दिखाना शुरू किया। यही वह समय था जब इन देशों ने पुरातन पड़ चुकी औपनिवेशिकता को धो पोंछ कर नवसाम्राज्यवादी विस्तार का नया रूप दे दिया। नीलाक्षी सिंह एक समर्थ कथाकार उपन्यासकार हैं। हाल ही में सेतु प्रकाशन से आया उनका उपन्यास 'खेला' सही मायनों में नवसाम्राज्यवादी विस्तार को न केवल उद्घाटित करता है बल्कि निर्दयी आर्थिक दुष्चक्र का रेशा रेशा खोल कर रख दिया है। नीलाक्षी सिंह के उपन्यास खेला पर कवि आलोचक चन्द्रकला त्रिपाठी ने एक समीक्षा लिखी है। आइए आज हम पहली बार पर पढ़ते हैं नीलाक्षी सिंह के उपन्यास 'खेला' पर चन्द्रकला त्रिपाठी की...