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लाल बहादुर वर्मा पर कविताएं

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  लाल बहादुर वर्मा  अपने आप में एक विरल व्यक्तित्व थे प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा। इतिहास का बोध कराने वाले अकेले साधक जो ता उम्र अपने काम में एक मजदूर की तरह निरन्तर जुटे रहे। उनका मानना था कि  मार्क्सवाद सिर्फ रोजी-रोटी की लड़ाई नहीं है बल्कि यह मानव जीवन  को सुंदर  बनाने की जद्दोजहद है। इस  जद्दोजहद में वे कुछ भी कर गुजरने के लिए प्रतिबद्ध थे। सहजता और सहृदयता उनकी पूंजी थी। वे नाम के नहीं बल्कि सचमुच के प्रोफेसर थे। इसके बावजूद वे लाल बहादुर कहलाया जाना ही अधिक पसन्द करते थे। वे वह दुनिया चाहते थे जो वास्तविक अर्थों में  खूबसूरत हो। जिंदगी भर दुनिया को खूबसूरत बनाने के लिए लगे रहे। आजीवन यह सपना देखते रहे और अन्ततः इस सपने के साथ ही उन्होंने अपनी अन्तिम सांस ली। इतिहास विषय पर उन्होंने कुछ मौलिक पुस्तकें लिखीं और 'इतिहास बोध' जैसी पत्रिका का सम्पादन किया।  इतिहास को साहित्य से जोड़ कर देखे जाने और मौखिक इतिहास पर बल देने वाले इतिहासकार थे। उनका मूल्यांकन किया जाना आज भी बाकी है। बीते 10 जनवरी को लाल बहादुर जी का  जन्मदिन था। हम उनकी स्मृति ...

सौम्य मालवीय की कविताएं

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  सौम्य मालवीय  सौम्य मालवीय का जन्म  25 मई, 1987 को इलाहाबाद में  हुआ। इन्हें बचपन से ही कविता का परिवेश और संस्कार मिला है जो इनकी कविताओं में सहज ही देखा जा सकता है। कविताएँ लिखने के  अतिरिक्त अनुवाद में भी इनकी रुचि है। दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स के समाजशास्त्र विभाग से उन्होंने गणितीय ज्ञान के समाजशास्त्र पर पी-एच.डी. की डिग्री प्राप्त की है और इसी विषय पर आजकल अंग्रेज़ी में सतत लेखन करते रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के कई महाविद्यालयों में अध्यापन के बाद वे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी हिमाचल प्रदेश के मानविकी एवं समाज विज्ञान विभाग में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। ''घर एक नामुमकिन जगह है' (2021) नामक उनके कविता संग्रह को 2022 के भारत भूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हाल ही में  उनका दूसरा कविता संग्रह  'एक परित्यक्त पुल का सपना' (2024)  प्रकाशित हुआ है। सुनने सुनाने में पहाड़ भव्य लगता है लेकिन इस भव्य के भी अपने दुःख हुआ करते हैं। इस समय दुनिया में जो प्राणी, जो चीजें अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं उनम...