कैथरिन मेन्सफील्ड की कहानी 'नाशपाती का पेड़'
कैथरिन मेन्सफील्ड जीवन को जीने का सबका अपना अलग तरीका होता है। इसका कोई एक ढांचा नहीं होता। इसीलिए सब इसे अपने अंदाज में जीने की कोशिश करते हैं। कैथरीन मैन्सफील्ड नैसर्गिक रूप से स्वच्छंद स्वभाव वाली महिला कहानीकार थीं। परंपरागत रूप से स्त्रियों का अनिश्चित भविष्य वाला जीवन उन्हें पसन्द नहीं था। इस विचार ने ही उनमें विद्रोह का बीज-वपन कर दिया। खुद कैथरीन भी अपने जीवन को अपेक्षित मोड़ न दे सकीं जिससे उनका स्वभाव असंतुलित और जीवन अव्यवस्थित रहा। आरंभ में जीवन की कठोरताओं ने उसकी रचनाओं को भी कटुता तथा तीखे व्यंग्य से पूर्ण बनाया। सोलह साल की उम्र में ही अपनी स्कूली दोस्त को लिखे पत्र में उसकी स्वाभाविक स्वतंत्रता की स्पष्ट झलक मिलती है: मैं किस कदर चाहती हूँ कि सभी स्त्रियों का एक निश्चित भविष्य हो- क्या तुम नहीं चाहती? बैठे-बैठे एक अदद पति का इंतजार करने के ख्याल से ही मुझे सख्त नफरत है, लेकिन बहुतेरी लड़कियाँ तो ऐसे ही सोचती हैं। ... तुम्हारी इस ख्वाहिश के बारे में पढ़ कर मैं मुस्कुरा उठी कि तुम अपनी तकदीर खुद बनाना चाहती हो- ओह, कितनी ही बार मैंने खुद भी ऐसा ही महसूस किया है। मेरी ललक...